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प्रणब की किताब में दावा- भारत में मिलना चाहता था नेपाल, किंतु नेहरू ने ठुकराया था प्रस्ताव

प्रणब मुखर्जी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू को लेकर चौंकाने वाला दावा किया है। 

⚫प्रणब मुखर्जी ने दावा किया है कि नेहरू ने नेपाल को भारत में विलय करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। 

⚫पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी बहुचर्चित ऑटोबायोग्राफी ‘द प्रेसिडेंशियल ईयर्स’ में दावा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नेपाल के भारत में विलय करने के राजा त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

⚫उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी जगह इंदिरा होतीं तो शायद ऐसा नहीं करतीं।




क्या लिखा प्रणब मुखर्जी ने :-

ऑटोबायोग्राफी ‘द प्रेसिडेंशियल ईयर्स’ के चैप्टर 11 'माई प्राइम मिनिस्टर्स: डिफरेंट स्टाइल्स, डिफरेंट टेम्परमेंट्स' शीर्षक के तहत प्रणब मुखर्जी ने लिखा है कि, 'नेहरू ने बहुत कूटनीतिक तरीके से नेपाल से निपटा। नेपाल में राणा शासन की जगह राजशाही के बाद हरू ने लोकतंत्र को मजबूत करने अहम भूमिका निभाई। दिलचस्प बात यह है कि नेपाल के राजा त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह ने नेहरू को सुझाव दिया था कि नेपाल को भारत का एक प्रांत बनाया जाए। लेकिन नेहरू ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।' उनका कहना है कि नेपाल एक स्वतंत्र राष्ट्र है और उसे ऐसा ही रहना चाहिए। वह आगे लिखते हैं कि अगर इंदिरा गांधी उनकी जगह होतीं, तो शायद वह अवसर का फायदा उठातीं, जैसा कि उन्होंने सिक्किम के साथ किया था।


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ट्रम्प ने इस्लामिक आतंकवाद के चेहरे पर जरा तमाचा कहा एक साथ लड़ेंगे इस्लामिक आतंकवाद से

मुख्य  बिंदु :-
  1. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  ने मोटेरा स्टेडियम में लोगों को संबोधित किया
  2. भारत के लिए अमेरिका के दिल में खास जगह है : ट्रम्प 
  3. हर कोई पीएम मोदी को प्यार करता है : ट्रम्प
  4. हर मिनट 12 लोग गरीबी रेखा के ऊपर जा रहे हैं : ट्रम्प 
  5. भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं की ट्रम्प ने तारीफ़ की  
  6. ट्रंप ने कहा भारत में  हर साल 2,000 फिल्में बनती हैं. 
  7. यहां DDLJ और शोले जैसी फिल्में भी बनती हैं.
  8. यहां सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली सरीखे क्रिकेट के बड़े खिलाड़ी हैं : ट्रम्प 
  9. भारत के हर गांव को आज बिजली मिल रही है : ट्रम्प 
  10. भारत की विविधता में ही एकता है : ट्रम्प 
  11. भारत की एकता पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है.
  12. अमेरिका भारत के साथ कल (मंगलवार को) रक्षा समझौते करेगा : ट्रम्प 
  13. भारत अमेरिका एक साथ इस्लामिक आतंकवाद का सामना करेंगे :ट्रम्प 



    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  ने मोटेरा स्टेडियम में लोगों को संबोधित किया :-
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मोटेरा स्टेडियम  (Motera Stadim )में लोगों को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत के लिए अमेरिका के दिल में खास जगह है. राष्ट्रपति ने कहा, 'हर कोई पीएम मोदी को प्यार करता है. आप सिर्फ गुजरात नहीं बल्कि पूरे देश का मान हैं.' ट्रंप ने कहा कि 'हर मिनट 12 लोग गरीबी रेखा के ऊपर जा रहे हैं.' भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए ट्रंप ने प्रधानमंत्री की तारीफ की. ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका भारत को प्यार करता है, भारत की इज्जत करता है और अमेरिका हमेशा भारत का ईमानदार और निष्ठावान दोस्त रहेगा.' उन्होंने कहा कि मोटेरा का स्टेडियम बहुत ही खूबसूरत है और हम यहां लंबी यात्रा करके संदेश देने आए हैं कि हम भारत को प्यार करते हैं.


    ट्रम्प ने फिल्मो और खेल PAR भी बात की :-
    ट्रंप ने कहा भारत में  हर साल 2,000 फिल्में बनती हैं. यहां DDLJ और शोले जैसी फिल्में भी बनती हैं. कहा कि यहां सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली सरीखे क्रिकेट के बड़े खिलाड़ी हैं. उन्होंने कहा कि भारत के हर गांव को आज बिजली मिल रही है. ट्रंप ने कहा समूची मानवता के लिए भारत एक उम्मीद है.हाउडी मोदी का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा, '5 महीने पहले अमेरिका ने टेक्सास में एक विशाल फुटबॉल स्टेडियम में आपके महान प्रधानमंत्री का स्वागत किया और आज भारत ने अहमदाबाद में दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम में हमारा स्वागत किया है.


    भारत को विविधता में  एकता वाला देश बताया :-
    होली के त्योहार का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि अगले महीने भारत में रंगो का त्योहार है. यहां दीवाली मनाई जाती है. ईद भी मनाई जाती है. भारत की विविधता में ही एकता है. कहा कि , 'मोदी एक अद्भुत नेता हैं, भारत के लिए दिन-रात काम करते हैं. भारत की पूरे विश्व में इस बात के लिए तारीफ की जाती है कि यहां लाखों हिन्दू, मुस्लिम, सिख, जैन, ईसाई और यहूदी साथ-साथ प्रार्थना करते हैं। भारत की एकता पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है.'


    मोटेरा में रक्षा समझौतों का जिक्र :-
    राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ कल (मंगलवार को) रक्षा समझौते करेंगे. उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत एक साथ इस्लामिक आतंकवाद का सामना करेंगे और उसे हराएंगे. मोटेरा से पाकिस्तान को संदेश देते हुए ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान हर देश को अपनी सीमाओं पर नियंत्रण और सुरक्षित करने का हक है. अमेरिका और भारत अपनी सीमाओं और विचारधारा के लिए खड़े हैं. हमारी सरकार पाकिस्तान के साथ आतंकियों के खात्मे पर काम कर रही है.

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    राजेन्द्र प्रसाद की पूर्ण जीवनी, एक बार जरूर पढ़े ।



    नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका भारत आइडिया में तो दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं आजाद भारत के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की जीवनी के बारे में तो आइए जानते हैं, कौन थे राजेंद्र प्रसाद? क्या थे राजेंद्र प्रसाद ? और कैसा रहा उनका जीवन?

    राजेन्द्र प्रसाद की पूर्ण जीवनी, एक बार जरूर पढ़े ।

    डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद :- राष्ट्रपति के सूचि में पहला नाम डॉ राजेन्द्र प्रसाद का आता है. जो भारतीय संविधान के आर्किटेक्ट और आज़ाद भारत के पहले राष्ट्रपति भी थे. उनका जन्म 1884 में हुआ था और डॉ प्रसाद, महात्मा गांधी के काफी करीबी सहयोगी भी थे. इसी वजह से वे भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस में भी शामिल हो गए थे और बाद में बिहार क्षेत्र के प्रसिद्ध नेता बने.नमक सत्याग्रह के वे सक्रीय नेता थे और भारत छोडो आंदोलन में भी उन्होंने भाग लिया था और ब्रिटिश अधिकारियो को घुटने टेकने पर मजबूर किया था.





    • डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का परिचय :
    • पूरा नाम :राजेंद्र प्रसाद महादेव सहाय
    • जन्म:3 दिसंबर 1884
    • जन्मस्थान :जिरादेई (जि. सारन, बिहार)
    • पिता:महादेव
    • माता :कमलेश्वरी देवी
    • शिक्षा:1907  में कोलकता विश्वविद्यालय से M.A., 1910 में बॅचलर ऑफ लॉ उत्तीर्ण, 1915 में मास्टर ऑफ लॉ उत्तीर्ण.
    • विवाह:राजबंस  देवी के साथ




    डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद भारतीय लोकतंत्र के पहले राष्ट्रपति थे.साथ ही एक भारतीय राजनीती के सफल नेता, और प्रशिक्षक वकील थे. भारतीय स्वतंत्रता अभियान के दौरान ही वे भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस में शामिल हुए और बिहार क्षेत्र से वे एक बड़े नेता साबित हुए.महात्मा गाँधी के सहायक होने की वजह से, प्रसाद को ब्रिटिश अथॉरिटी ने 1931 के नमक सत्याग्रह और 1942 के भारत छोडो आन्दोलन में जेल में डाला.राजेन्द्र प्रसाद ने 1934 से 1935 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में भारत की सेवा की. और 1946 के चुनाव में सेंट्रल गवर्नमेंट की फ़ूड एंड एग्रीकल्चर मंत्री के रूप में सेवा की. 1947 में आज़ादी के बाद, प्रसाद को संघटक सभा में राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया गया.

    1950 में भारत जब स्वतंत्र गणतंत्र बना, तब अधिकारिक रूप से संघटक सभा द्वारा भारत का पहला राष्ट्रपति चुना गया.इसी तरह 1951 के चुनावो में, चुनाव निर्वाचन समिति द्वारा उन्हें वहा का अध्यक्ष चुना गया.राष्ट्रपति बनते ही प्रसाद ने कई सामाजिक भलाई के काम किये, कई सरकारी दफ्तरों की स्थापना की और उसी समय उन्होंने कांग्रेस पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया.राज्य सरकार के मुख्य होने के कारण उन्होंने कई राज्यों में पढाई का विकास किया कई पढाई करने की संस्थाओ का निर्माण किया और शिक्षण क्षेत्र के विकास पर ज्यादा ध्यान देने लगे.उनके इसी तरह के विकास भरे काम को देखकर 1957 के चुनावो में चुनाव समिति द्वारा उन्हें फिर से राष्ट्रपति घोषित किया गया और वे अकेले ऐसे व्यक्ति बने जिन्हें लगातार दो बार भारत का राष्ट्रपति चुना गया.




    एक नजर में  डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जानकारी :
    • 1906 में राजेंद्र बाबु के पहल से ‘बिहारी क्लब’ स्थापन हुवा था,उसके सचिव बने.
    • 1908 में राजेंद्र बाबु ने मुझफ्फरपुर के ब्राम्हण कॉलेज में अंग्रेजी विषय के अध्यापक की नौकरी मिलायी और कुछ समय वो उस कॉलेज के अध्यापक के पद पर रहे.
    • 1909 में कोलकत्ता सिटी कॉलेज में अर्थशास्त्र इस विषय का उन्होंने अध्यापन किया.
    • 1911 में राजेंद्र बाबु ने कोलकता उच्च न्यायालय में वकीली का व्यवसाय शुरु किया.
    • 1914 में बिहार और बंगाल इन दो राज्ये में बाढ़ के वजह से हजारो लोगोंको बेघर होने की नौबत आयी. राजेंद्र बाबु ने दिन-रात एक करके बाढ़ पीड़ितों की मदत की.
    • 1916 में उन्होंने पाटना उच्च न्यायालय में वकील का व्यवसाय शुरु किया.
    • 1917 में महात्मा गांधी चंपारन्य में सत्याग्रह गये ऐसा समझते ही राजेंद्र बाबु भी वहा गये और उस सत्याग्रह में शामिल हुये.
    • 1920 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में वो शामील हुये.इसी साल में उन्होंने ‘देश’ नाम का हिंदी भाषा में साप्ताहिक निकाला.
    • 1921 में राजेंद्र बाबुने बिहार विश्वविद्यालय की स्थापना की.
    • 1924 में पाटना महापालिका के अध्यक्ष के रूप में उन्हें चुना गया.
    • 1928 में हॉलंड में ‘विश्व युवा शांति परिषद’ हुयी उसमे राजेंद्र बाबुने भारत की ओर से हिस्सा लिया और भाषण भी दिया.
    • 1930 में अवज्ञा आंदोलन में ही उन्होंने हिस्सा लिया। उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेजा गया.जेल में बुरा भोजन खाने से उन्हें दमे का विकार हुवा.उसी समय बिहार में बड़ा भूकंप हुवा.खराब तबियत की वजह से उन्हें जेल से छोड़ा गया.भूकंप पीड़ितों को मदत के लिये उन्होंने ‘बिहार सेंट्रल टिलिफ’की कमेटी स्थापना की. उन्होंने उस समय २८ लाख रूपयोकी मदत इकठ्ठा करके भूकंप पीड़ितों में बाट दी.
    • 1934 में मुबंई यहा के कॉग्रेस के अधिवेशन ने अध्यपद कार्य किया.
    • 1936 में नागपूर यहा हुये अखिल भारतीय हिंदी साहित्य संमेलन के अध्यक्षपद पर भी कार्य किया.
    • 1942 में ‘छोडो भारत’ आंदोलन में भी उन्हें जेल जाना पड़ा.
    • 1946 में पंडित नेहरु के नेतृत्व में अंतरिम सरकार स्थापन हुवा। गांधीजी के आग्रह के कारन उन्होंने भोजन और कृषि विभाग का मंत्रीपद स्वीकार किया.
    • 1947 में राष्ट्रिय कॉग्रेस के अध्यक्ष पद पर चुना गया. उसके पहले वो घटना समिती के अध्यक्ष बने,घटना समीति को कार्यवाही दो साल, ग्यारह महीने और अठरा दिन तक चला.घटना का मसौदा बनाया,26 नव्हंबर, 1949 को वो मंजूर हुवा और 26 जनवरी, 1950 को उसपर अमल किया गया.भारत प्रजासत्ताक राज्य बना. स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति होने का सम्मान राजेन्द्रबाबू को मिला.
    • 1950 से 1962 ऐसे बारा साल तक उनके पास राष्ट्रपती पद रहा. बाद में बाकि का जीवन उन्होंने स्थापना किये हुये पाटना के सदाकत आश्रम में गुजारा.
    • हम डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को आज़ाद भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में याद करते है लेकिन इसके साथ ही उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता अभियान में भी मुख्य भूमिका निभाई थी और संघर्ष करते हुए देश को आज़ादी दिलवायी थी.
    • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद में भारत का विकास करने की चाह थी. वे लगातार भारतीय कानून व्यवस्था को बदलते रहे और उपने सहकर्मियों के साथ मिलकर उसे और अधिक मजबूत बनाने का प्रयास करने लगे. हम भी भारत के ही रहवासी है हमारी भी यह जिम्मेदारी बनती है की हम भी हमारे देश के विकास में सरकार की मदद करे.ताकि दुनिया की नजरो में हम भारत का दर्जा बढ़ा सके.


    डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ग्रंथसंपदा
    - डीव्हायडेड इंडिया
    - आत्मकथा
    - चंपारन्य सत्याग्रह का इतिहास आदी

    पुरस्कार : 1962 में ‘भारतरत्न’ ये सर्वोच्च भारतीय सम्मान उनको प्रदान किया गया.
    मृत्यू :  28 फरवरी 1963 को उनकी मौत हुयी.

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    हिंदू सांसद 2020 में लड़ेगी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, पढ़े कौन है वो.


    नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका भारत आइडिया में तो, दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं उस हिंदू सांसद के बारे में जो शायद 2020 में लड़ सकती हैं अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव.

    हिंदू सांसद 2020 में लड़ेगी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, पढ़े कौन है वो.

    क्या है खबर:
    जी हां दोस्तों आपने सही सुना अमेरिकी संसद में हवाई से पहली हिंदू सांसद तुलसी गबार्ड के करीबी सूत्रों का कहना है कि वह 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में लड़ने पर विचार कर रही हैं .शुक्रवार को लॉस एंजिल्स में एक मेडट्रॉनिक सम्मेलन में भारतीय मूल की अमेरिकी डॉक्टर संपत शिवांगी ने 37 साल की तुलसी गबार्ड का परिचय कराते हुए कहा कि वह 2020 में अमेरिका की अगली राष्ट्रपति हो सकती है. इस संक्षिप्त परिचय के बाद लोगों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट से इस खबर का स्वागत किया लेकिन  तुलसी गबार्ड ने सभा को संबोधित करते हुए ना तो इस खबर की पुष्टि की और ना ही खंडन किया जिसके मद्देनजर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद ऐसा हो सकता है कि तुलसी 2020 में  अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव लड़े.


    अगले वर्ष तक इसकी पुष्ठि की जा सकती है :
    तुलसी के करीबी तथा चिंतन प्रणाली से वाकिफ लोगों ने बताया कि इस बात पर कोई फैसला क्रिसमस से पहले किया जा सकता है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उसकी कोई औपचारिक घोषणा भी की जाए क्योंकि इसे अगले साल तक लंबित रखा जा सकता है. वही मिल रही खबर के जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि 2020 के चुनाव के लिए प्रभावशाली अभियान खड़ा करने के लिए तुलसी और उनकी टीम खामोशी से संभावित दानदाताओं से संपर्क कर रही हैं .इन दानदाताओं में एक बड़ी संख्या भारतीय मूल के अमेरिकियों की भी है.

    जाने मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक किसकी कितनी तनख्वाह है।


    नमस्कार मित्रो जैसा की आप सभी के मन मे यह प्रश्न जरूर उठता होगा की की हमारे भारत के प्रधानमंत्री और
    राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की मासिक आय कितनी है,  तो आज सभी इसके बारे मे ही पढ़ेंगे।

    • उपराष्ट्रपति की सैलरी ४लाख प्रतिमाह है और इसके अलावा  उपराष्ट्रपति को भी राष्ट्रपति की तरह सभी  अन्य भत्तो का भुगतान किया जाता हैं।

    • अब हम बात करेंगे अपने देश के प्रधानमंत्री के बारे मे यानी की नरेंद्र मोदी जी के मासिक आय के बारे मे, नरेंद्र मोदी जी की मासिक आय १लाख  ६० हजार रुपये है। इसके अलावा इन्हे अन्य सरकारी सुख सुविधाओ का भी मुहहिया करवाया जाता है।

    • अब हम बात करेंगे मुख्यमंत्री के बारे मे, हमारे देश मे उपलब्ध हर मुख्यमंत्री की मासिक आय अलग अलग होती है।
    वही अगर हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की मासिक आय  की बारे मे बात करे तो १लाख ६० हजार रुपये है।
    वही केरल और सिक्किम के मुख्यमंत्री की मासिक आय क्रमश: १लाख ८०हजार और १ लाख ९०हजार है।

    • वही अगर सांसदो की बात की जाए तो उनकी मासिक आय ५०,००० तक हैं।

    •अगर हम बात करे विधायको की तो मुख्यमंत्री की तरह सभी राज्यो की मासिक आय अलग अलग होती है, लेकिन तेलंगाना मे विधायको की  मासिक आय सबसे ज्यादा २.५ लाख है और सबसे कम त्रिपुरा के  विधायको की ३,५०० हजार रोये है।

    संपादक: आशुतोष उपाध्याय

    पूर्व राष्ट्रपति के अकाउंट से चुराई गयी सूचनाये : रिश्तेदार



    हमारे पूर्व राष्ट्रपति ए पि जे अब्दुल कलम से जुड़ी एक बरी खबर आ रही है, दरअसल अब्दुल कलम के रिश्तेदार शेख दाऊद कलाम ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ट्विटर पेज ' कलाम सेंटर ' के मालिक को यह ट्विटर अकाउंट उनके परिवार को सौपने का निर्देश देने की अपील की है। प्रधानमंत्री के नाम से अब्दुल कलाम के रिश्तेदार दाऊद ने ये आवेदन किया है और कहा है की 2016 में पूर्व राष्ट्रपति के निधन के बाद उनका परिवार शिरजनपाल सिंह से ये आकउंट उनके भाई को सौपने की मांग कर रहा है लेकिन शिरजनपाल सिंह सिंह ये अकाउंट नहीं सौप रहे है। 
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     शिरजनपाल सिंह ने अब्बदुल कलाम को ये अकाउंट बनाने में मदद की थी, दाऊद ने अपने आवेदन में आगे कहा की कलाम के साथ अंशकालिक कर्मचारी रहे भारतीय मिलट्री इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व विद्यार्थी  शिरजनपाल सिंह ने उनकी बात नहीं मानी और उन्होंने उसका नाम कलम सेंटर रखकर नया पेज शुरू कर दिया। दाऊद ने दवा किया है की  शिरजनपाल सिंह ने अब्दुल कलाम के अकाउंट से कुछ सूचनाये चुराई है और उन्हें उन्हें सेंटर के अकाउंट में रिकॉर्ड कराया, ऐसे में सरकार को  शिरजनपाल सिंह के विरुद्ध करवाई करनी चाहिए और अब्दुल कलाम के आकउंट को उनके परिवार को सौप देना चाहिए। 


    सम्पादक : विशाल कुमार सिंह
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    अब राष्ट्रपति भवन में नहीं होगी इफ्तार पार्टी :रामनाथ कोविंद / Iftar party now will not be in Rashtrapati Bhavan: Ramnath Kovind




    राष्ट्रपति भवन में इस बार किसी प्रकार की इफ्तार पार्टी नहीं मनाई जाएगी साथ ही देश के करदाताओं के पैसो को किसी भी धर्म के त्यौहार में नहीं लगाया जायेगा।

    जानकारी के मुताबि इस कदम से राष्ट्रपति ने यह सन्देश देने की कोशिश की गयी राष्ट्रपति भवन पुरे देश के लिए धर्मनिर्पेक्छ भाव रखता है, इसलिए भवन में दह्र्म से जुड़े किसी त्यौहार का योजन नहीं क्या जायेगा चाहे वो इफ्तार पार्टी हो या फिर किसी और धर्म का धार्मिक त्यौहार।

    सनातन धर्म को जाने मात्र 10 बिन्दुओ में जरूर पढ़े / Know Sanatan Dharma in just 10 points

    राष्ट्रपति के इस फैसले के बाद कांग्रेस ने छुपी साध ली है और कहा है की राष्ट्रपति के फैसले पर सवाल उठा गलत होगा इसलिए हम इस पर कोई बयां नहीं देंगे।

    वेद, उपनिषद और संगदर्शन क्या है / What is the Vedas, Upanishads and Sagdarshan


    • वही कांग्रेस की और से 13 तारीख को राहुल गाँधी एक बहोत बरी इफ्तार पार्टी देने जा रहे है जिसमे कांग्रेस विपक्छ का शक्ति प्रदर्शन करेगी।
    • आपको हम बाटडे की बाईट त्योहारों में रस्ट्रपति कोविन ने क्रिसमस और दिवाली पर भी रोक लगाई थी।
    • कालाम सर ने भी रोक लगाई थी इफ्तार पार्टी पर।
    • 2008 में केरल सिंगिंग पर प्रतिभा पाटिल ने रोक लगाया था।


    सम्पादक : विशाल कुमार सिंह

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    12 को मिलेंगे दुनिया के दो ताकतवर राजनेता / two powerful statesman will meet on 12th june



    सबसे बरे दुश्मन शनरी वार्ता के लिए सिंगापुर पहुँच गए है। एक दुनिया के सबसे मजबूत देश का राष्ट्रपति है तो दुशरा एक छोटे से मुल्क का तानाशाह है। अब दोनों सिंगापूर के सेंटोसा टापू के फाइव स्टार होटल कपेला में 12 जून को मुलाकात करेंगे, इसके लिए पुरे इलाके में सुरछा के इंतजाम किये जा रहे है। आपको हम बताना चाहेंगे अकेले इनकी सुरछा पर सिर्फ 50 करोड़ से ऊपर खर्च किये जा रहे है।

    वीडियो में देखिये कैसे कश्मीरी आतंकियों की जैकार कर रहे है



    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रूप और नार्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग के मुलाकात पर साड़ी दुनिया की नजर है।  आपको जानकार हैरानी होगी की दुनियाभर के पत्रकार सिंघपुर पहुँच चुके है। इनदोनो के मुलाकात के साथ ही तये हो जायेगा की दुनिया शांति की रह पर जाएगी या परमाणु युद्ध की और।

    वीडियो में देखे आतंकियों ने कैसे सेना पर छुप कर हमला किया



    ये मुलाकात अब तक की राजनीती घटना की सबसे बरी मुलाकात मानी जा रही है और 12 जून की ये मुलाकात शायद इतिहास के पन्नो में दर्ज होगा की ये दिन शन्ति की राह या परमाणु युद्ध का राह बना।

    पढ़े पिछले 4 दिनों में वादी में जवानो पर कितने हमले हुए



    ट्रम्प और किम जोंग की मुलाकात को हम चमत्कार से काम नहीं मान सकते क्युकी कुछ दिन पहले ये एक दूसरे  के पीछे हाथ धो कर परे थे, हर ट्वीट्स में भासन में परमाणु बोम की बटन दबाने की धमकी दे रहे थे।

    ट्रम्प जहाँ 71 वर्ष के है वही किम जोंग 34 वर्ष के है बरहाल जो भी हो दुनिया तो यही चाह रही की दोनों की मुलाकात खुशनुमा हो और शांति का रास्ता निकले।

    सम्पादक : विशाल कुमार सिंह

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    डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूज कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी मीडिया पर निकाली भड़ास / Donald Trump raises speculation on American media in the news conference

    व्हाइट हाउस को कवर करने वाले एक संवाददाता ने ट्रंप से पूछा, “मैं जानना चाहूंगा कि आप ऐसा क्यों करते हैं.” इस पर ट्रंप ने कहा, `क्योंकि अमेरिकी प्रेस निष्पक्ष नहीं है।



    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (१०जून) को एकल संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर पत्रकारों के सवालों का सामना किया।
     ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद यह दूसरा मौका था, जब उन्होंने अकेले मीडिया के सवालों का संवाददाता सम्मेलन में सामना किया। ट्रंप ने इस संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह इच्छा जताई कि देशों के बीच सामानों के मुक्त आयात - निर्यात के लिए सभी बाधाएं हटाई जाए। वह सिंगापुर में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ होने वाली अपनी प्रस्तावित शिखर वार्ता को लेकर भी आशान्वित हैं। इसके अलावा ट्रंप ने अमेरिकी प्रेस को बार - बार फटकार लगाने के अपने रवैये का बचाव करते हुए बताया कि वह ऐसा क्यों करते हैं।

    व्हाइट हाउस को कवर करने वाले एक संवाददाता ने ट्रंप से पूछा, “मैं जानना चाहूंगा कि आप ऐसा क्यों करते हैं.” इस पर ट्रंप ने कहा, “क्योंकि अमेरिकी प्रेस निष्पक्ष नहीं है।

    ज्यादातर ऐसे हैं लेकिन सभी ऐसे नहीं है। आपके पेशे में कुछ लोग हैं जो अमेरिका के साथ हैं, अमेरिका में है, अमेरिकी नागरिक हैं और वह संवाददाता है। ये कुछ बेहद शानदार लोग हैं जिन्हें मैं जानता हूं। लेकिन प्रेस में कुछ ऐसे लोग हैं जो अविश्वसनीय रूप से निष्पक्ष नहीं हैं। वह सकारात्मक खबरों की रिपोर्टिंग भी नहीं करते हैं.”


    "डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उत्तर कोरिया के साथ संबंध बनाने का एकमात्र मौका"
    वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ उनकी बैठक के दौरान उन्हें एक मिनट में ही इस बात का पता चल जाएगा कि शांति के लिये उनके इस ‘‘एक मात्र प्रयास’’ के भविष्य में सफल होने के आसार है या नहीं। कनाडा में चल रहे  शिखर सम्मेलन के समापन के बाद एशिया की तरफ रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा, 'यह सही अर्थ में एक अज्ञात क्षेत्र है, लेकिन मैं वास्तव में आत्मविश्वास से भरा हूं.' 

    उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि किम जोंग उन अपने लोगों के लिए अच्छा करना चाहते हैं और उनके पास ऐसा करने का अवसर है ... यह एकमात्र मौका है.’ ट्रम्प ने कहा कि उत्तर कोरिया ‘‘हमारे साथ बेहद अच्छा काम कर रहा है.’’

    संपादक: आशुतोष उपाध्याय

    चीन ने भारत के सामने घुटने टेके / China kneeled in front of India

    चीन भले ही कितना भी शक्तिशाली देश हो लेकिन हिन् को एक बात पता है की भारत  अंजाम बुरा होगा, पढ़े पूरी खबर


    चीन के राष्ट्रपति सी जिनपिंग ने अगले साल भारत में वुहान जैसी औपचरिक्ता वार्ता के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंतरण को स्वीकार कर लिया है।

    विदेश सचिव विजय गोखले ने ये जानकारी दी है।

    आतंक और पाक पर चीन से होगी बात/China is ready to talk about terror and Pakistan


    दोकलामा गतिरोध के बाद सम्बन्धो में मजबूती लाने के लिए 27-28 अप्रैल को प्रधानमंरतरी भी अनऔपचारिकता दौरे पर चीन के वुहान शहर गए थे। जहाँ दोनों नेताओ के बिच अनौपचारिक वार्ता हुई थी उसके बाद मोदी जी ने शी जिनपिंग को भारत में आने का नेवता दिया था, जिसको की चीन ने स्वीकार कर लिया है। अभी अनौपचारिक बैठक की तारीख तये नहीं की गयी है।

    सबसे बरे मुस्लिम देश में रामायण का किया जाता है मंचन पढ़े पूरी खबर


    मोदी संघई सहयोग संगठन के सालाना सम्मलेन में शामिल होने के लिए दो दिवसीय दौरे पर चीन के सनडोंग प्रान्त के तटीय सहर चिंगदाओ पहुंचे हुए है जहाँ उन्होंने SCO समिट में चीनी राष्ट्पति से वार्ता की।

    पिछले 4 वर्षो में आईएम दोनों नेताओ की 14वी मुलाकात थी।

    अब देखना होगा की अगले शाल जिनपिंग के आने पर पाकिस्तान की स्थिति क्या रहती है और भारत से चीन के रिश्ते सुधरते है या बिगड़ते है।

    सम्पादक : विशाल कुमार सिंह

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    संघ का शिष्टाचार और प्रणव दा का संवाद/Sangh's etiquette and Pranav da's dialogue


    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर मुख्यालय में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का आ जाना और संघ शिक्षा वर्ग के स्वयंसेवकों को संबोधित करना शिष्टाचार और संवाद के बीच की वह अवस्था है, जिसकी हर व्यक्ति अपने अपने ढंग से व्याख्या कर सकता है, फिर भी इस आमंत्रण और व्याख्यान कि इस बात के लिए तारीफ करनी होगी कि इस से संवाद का एक सिलसिला शुरु हुआ है- और उन लोगों की आशंकाएं निराधार साबित हुई है, जो उनके नागपुर जाने पर हाय-तौबा मचाए हुए थे। उल्टे देश के इस संवाद का स्वागत ही किया है।

     देश में अगर एक दूसरे की बात सुनने और उसके अच्छे तत्व ग्रहण करने का सिलसिला चल निकले और संवाद की मर्यादा स्थापित हो तो इससे गलतफहमी और तनाव स्वता ही कम होगा और यही लोकतंत्र है।

    इस में गड़बड़ी वह लोग कर रहे हैं, जो यह दावा कर रहे हैं कि देखो हम जीत गए जबकि जितने की जरूरत भारत और उसके लोकतंत्र की है पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने वहां पर भी कहा जो उन्होंने कांग्रेस पार्टी में लंबे संबंध के चलते और अपने अध्ययन-मनन से उपजे उधार विचारों से ग्रहण किया था।
    उस सोच से मतभेद होते हुए भी एकरूपता के विचार वाले संघ ने उन्हें सुनकर शालीनता का परिचय दिया। प्रणव दा ने संवैधानिक देशभक्ति ,बहुलवाद जैसे मूल्यों को बचाने का आह्वान किया और यह भी कहा कि कट्टरता धर्म क्षेत्र नफरत के आधार पर राष्ट्रवाद को परिभाषित करने की कोशिश-

    हमारी राष्ट्रीय पहचान खत्म कर देगी उन्होंने बहुलता के विचार के लिए तिलक और गांधी के नेतृत्व में चलाए गए स्वाधीनता संघर्ष को श्रेय दिया और जवाहरलाल नेहरू का कई बार उल्लेख किया। उन्होंने व्याख्यान में से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ने अपना भाषण दिया था ताकि स्पष्ट हो जाएगी संघ विविधता और वैचारिक भिन्नता के विरुद्ध नहीं है संघ हिंदुत्व की विचारधारा को इस राष्ट्र के केंद्रीय विचारधारा बनाने का लक्ष्य  रखता है। इसी विचार के तहत संघ उन सभी धर्म के लोगों के हिंदू होने का दावा करता है, जो भारत में रहते हैं।


    अब देखना है कि भाजपा के ४ साल के शासन में संघ और और असहमत राजनीतिक और सामाजिक समूहों ने जो असहजता महसूस की है ,क्या संघ *उसे दूर करने की कोशिश करेगा?

    संपादक :आशुतोष उपाध्याय

    वो 5 बाते जो पहले संघ परिवार में नहीं हुई

    वैसे तो संघ परिवार के बारे में हम सब जानते है लेकिन संघ ने इस बार अपनी कद और ऊंची कर ली जब सरसंघचालक ने कुछ परम्पराओ को पूर्व राष्ट्पति के लिए तोरी, पढ़े पूरी खबर :




    वैसे तो अतिथि के स्वागत के लिए संघ के शहर या प्रान्त पदाधिकारी जाते है, लेकिन प्रणव डा के स्वागत के लिए सहसरकार्यवाह वही भगयेया और अखिल  भारतीय सह संपर्क सुनील देशपांडे पहुंचे थे।

    Mysterious Facts ताजमहल के रहस्य । TAJ MAHAL is a Hindu Shiv Temple:



    संघ के बुलावे पर नागपुर आये प्रणव मुखर्जी राजभवन में रुके, चुकी वो मेहमान थे इसलिए पहली बार खुद सरसंचालक मोहन भगवत ने राजभवन पहुँच उनसे मुलाकात की, इससे पहले ऐसी मुलकात सरसंचालक ने खुद जा कर नहीं की थी।

    श्रीमदभागवतगीता : कब, कहाँ और कैसे


    प्रणव दा को परम पूजनीय डॉक्टर साहब  पर पुष्प अर्पित करने को कहा गया जिसको उन्होंने तुरंत मान लिया जिसके बाद प्रणव मुखर्जी के स्वागत के लिए मोहन भगवत खुद पहुंचे।

    प्रणब मुखर्जी दिल्ली संघचालक के साथ आज नागपुर पहुंचेंगे: कांग्रेस के 30 नेताओं ने संघ के कार्यक्रम में ना जाने की अपील की


    आमतौर पर तृतीये वर्ग शिक्षा वर्ग में पहले अतिथि का भासन होता है बाद में संघचालक का लेकिन इस बार उल्टा हुआ, इस बार पहले मोहन भागवत जी  बोले।

    आक्रोश: किसान आंदोलन की आंच बिहार में भी पहुंची।


    सरसंघचालक ले बाद प्रणव मुखर्जी का भासन था और माइक हल्की ऊंची थी जिसको तुरंत मोहन भागवत जी ने खड़े होकर ठीक किया, आमतौर पर ऐसी स्थिति में स्वयंसेवक खुद इन चीजों को ठीक करने आजाते है।

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