हम राजनीती एवं इतिहास का एक अभूतपूर्व मिश्रण हैं.हम अपने धर्म की ऐतिहासिक तर्क-वितर्क की परंपरा को परिपुष्ट रखना चाहते हैं.हम विविध क्षेत्रों,व्यवसायों,सोंच और विचारों से हो सकते हैं,किन्तु अपनी संस्कृति की रक्षा,प्रवर्तन एवं कृतार्थ हेतु हमारा लगन और उत्साह हमें एकजुट बनाये रखता है.हम एक ऐसे प्रपंच में कदम रख रहें हैं जहां हमारे धर्म,शास्त्रों नियमों को कुरूपता और विकृति के साथ निवेदित किया जा रहा है.हम अपने धार्मिक ऐतिहासिक यथार्थता को समाज के सामने स्पष्ट करना चाहते है,जहाँ पुराने नियम प्रसंगगिक नहीं रहे.हम आपके विचारों के प्रतिबिंब हैं,हम आपकी अभिव्यक्ति के स्वर हैं और हम आपको निमंत्रित करते हैं,आपका अपना मंच 'BHARATIDEA' पर,सारे संसार तक अपना निनाद पहुंचायें!

नितीश का धर्म के नाम पर फिर से तुस्टीकरण, अब राज्यसभा में बीजेपी को किनारे करने की तैयारी




नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है भारत आइडिया के इस  नए संस्करण के समाचार लेख में। भारत आइडिया के पाठकों आज इस लेख में हम इस लेख में बात करेंगे नितीश कुमार की तुस्टीकरण की राजनीती के बारे में जहाँ उनकी पार्टी की तरफ से ये साफ़ कहा गया है की उनकी पार्टी राजयसभा में तीन तलाक बिल के मुद्दे को समर्थन नहीं देगी। 

समाचार पढ़ने से पहले एक गुजारिस है, हमारे फेसबुक पेज को  लाइक कर हमारे साथ जुड़े। 


तीन तलाक बिल पर बीजेपी के साथ नहीं : JDU  
बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार की अध्यक्षता वाली पार्टी और एनडीए की सहयोगी जेडीयू ने संसद के आगामी बजट सत्र में तीन तलाक पर लाए जाने वाले बिल का विरोध करने का फैसला किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और नितीश कुमार में हाल ही मंत्री बनाए गए श्याम रजक ने समाचार एजेंसी आईएनएस से कहा कि उनकी पार्टी तीन तलाक बिल के खिलाफ कानून का विरोध करती रही है और आगे भी उनकी पार्टी का यही रुख कायम रहेगा। रजक ने कहा कि तीन तलाक बिल का मुद्दा एक सामाजिक मुद्दा है और इसे उस समाज के लोगो द्वारा ही सुलझाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जेडीयू ने पहले भी तीन तलाक के खिलाफ लाए गए बिल का राज्यसभा में विरोध किया था।




नितीश कुमार ने पहले भी किया है तीन तलाक के बिल का विरोध 
बता दें कि कुछ दिनों पहले भी नितीश कुमार ने खुले आम तीन तलाक बिल का विरोध किया था। इसके अलावा नीतीश ने यह भी साफ किया था कि उनकी पार्टी अनुच्छेद 370 की समाप्ति, समान नागरिक संहिता लागू करने और अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए खुले तौर पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत या कोर्ट के फैसले के जरिए समाधान चाहती है।

नितीश कुमार जानते हैं कि राज्य सभा में सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है जिससे कि वह इस विधेयक को सदन सेपास करा सके। वहीं जेडीयू के कुल छह राज्य सभा सांसद हैं। दरअसल, नितीश कुमार ऐसा कर न केवल मुस्लिमों के हितैषी बने रहना चाहते हैं बल्कि वो स्पष्ट संदेश भी जेना चाहते हैं कि बीजेपी की प्रचंड जीत के बावजूद उनका नजरिया नहीं बदला है।


आपकी इस समाचार पर क्या राय है,  हमें निचे टिपण्णी के जरिये जरूर बताये और इस खबर को शेयर जरूर करे। 



About