आक्रोश: किसान आंदोलन की आंच बिहार में भी पहुंची।

आज हम बात करने जा रहे है किसान आंदोलन के बारे में जो कि अभी राजनीतिक मुद्दा बन विपक्ष को बोलने का मौका मिला है । देश के विभिन्न हिस्सों में ...

आज हम बात करने जा रहे है किसान आंदोलन के बारे में जो कि अभी राजनीतिक मुद्दा बन विपक्ष को बोलने का मौका मिला है ।

देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे,किसान आंदोलन की आंच पूर्णिया तक पहुंच गई है। मंगलवार को बैलगाड़ी लेकर जिले के किसान सड़क पर उतरे और उपज के गिरते भाव पर गुस्से का इजहार किया। आक्रोशित किसानों ने कलेक्ट्रेट के समक्ष प्रदर्शन एवं नारेबाजी भी की। कलेक्ट्रेट गेट पर मकई ,सब्जी दूध आदि फेक कर अपने दर्द को जगजाहिर किया।

किसानों ने अगले १० जून को बंद की भी धमकी दी है।
"फसल हमारी भाव तुम्हारा नहीं चलेगा नहीं चलेगा"
किनारे के साथ थाना चौक से किसानों ने रैली निकाली ,खजांची हॉट थाने की पुलिस रैली के साथ चल रही थी। जबकि कलेक्ट्रेट गेट पर पुलिस की ओर से सुरक्षा बढ़ा दी जाए कलेक्ट्रेट गेट पर ही किसानों को रोक दिया गया।इसके बाद किसानों ने कलेक्ट्रेट गेट के सामने ही बोरियों से निकालकर मकई,भिंडी,मिर्च आदि सड़क पर फेंकना शुरु कर दिया।

किसानों ने यह भी कहा कि सरकार ही तय करेगी किसान क्या उपजाए।
उपज पर गिरते भाव के मुद्दे पर आंदोलनकरता पूर्णिया के किसानों का आरोप है की मकई का भाव केवल ₹१०००क्विंटल है। इतने कम भाव में लागत भी नहीं निकल पा रही है मुनाफा तो दूर की बात है।
ऐसा कहना है आंदोलनकरता किसानों का।।

संपादक:आशुतोष उपाध्याय 

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