हिन्दुओ के सबसे बड़े धर्माचार्य श्री शंकराचार्य का क्या कहना है संघ और भाजपा के प्रति

1925 से संघ चला आ रहा देेेेश के प्रति निस्वार्थ भावना से कार्य करने हेतु लेकिन फिर भी कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए संघ पर बेतुके इल्जाम लगाते...

1925 से संघ चला आ रहा देेेेश के प्रति निस्वार्थ भावना से कार्य करने हेतु लेकिन फिर भी कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए संघ पर बेतुके इल्जाम लगाते रहते है। 



संघ के बारे में अभी शायद ही हिंदुस्तान  ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो नहीं जनता होगा लेकिन आज हम बात करने जाए रहे है शंकराचार्य के बारे में जिन्होंने शायद बिना इतिहास को जाने बेतुकी बात की है।
संघ से प्रेरित निस्वार्थ भावना से कार्य करने वाला भारत में एक राजनीतिक पार्टी भी है जिसका नाम बीजेपी  है। जिसने कभी भी पार्टी में वंशवाद नहीं किया, तब भी भारत के कुछ लोग का कहना है की भाजपा के शासन में  देश आगे नहीं बढ़ रहा है, तरक्की नहीं कर रहा है। 

धर्म गुरु शंकराचार्य की क्या रही टिपण्णी ?
हिंदूओं के सबसे बड़े धर्माचार्य श्री शंकराचार्य का कहना है कि भाजपा और संघ के कारण हिंदओं का नुकसान हो रहा है। लेकिन शंकराचार्य शायद ये भूल गए है की 1925 से पहले , जब संघ और भाजपा का जन्म भी नही हुआ था उस समय तक हिंदुओं का जो नुकसान और नाश हुआ इस देश मे उसके लिऐ कौन उतरदायी है। 

क्या हिंदुओं की दुर्दशा के लिऐ शंकराचार्य और उसके चारों पीठ बिल्कुल भी जिम्मेदार नही हैं ?
कहने को तो हिंदुओं के सबसे बड़े और मजबूत पीठ है देश के चारों कोनो मे कभी धर्म रक्षा के लिऐ बनाऐ गये थे, लेकिन आज हम स्वयं देख सकते है की इन पीठो के महंत कभी खुल कर हिन्दूत्व की रक्षा के लिए खड़े नहीं हुए सदैव अपने बिलो में आराम फरमाते है।
कभी ये लोग हिन्दुत्वा बात नहीं करते, कभी धर्म के उनत्ति के विकल्पों के बारे में बात नहीं करते, समाज सुधार के बारे में कभी चर्चा नहीं करते लेकिन जैसे ही चुनाव का वक़्त आता है ये अपने बिल से निकलते है और संघ और बीजेपी के लिए जहर जरूर उगल जाते है।
  
क्या शंकराचार्य भी किसी के इशारे पर इतनी करवी वाणी का इस्तेमाल करते है : 
इन बातो में सच्चाई कितनी है ये कहना तो मुश्किल है लेकिन जब कोई हिन्दू गुरु ऐसी बाते बोल जाता है तो मन में संका  उत्पन हो जाती है। 1925 के दशक से संघ के स्वयंसेवक निस्वार्थ भावना से देश की उन्नति के लिए कार्य करते है और बीजेपी संघ से प्रेरित एक दाल है फिरभी एक धर्म गुरु की ऐसी बाते मन में सक पैदा करती है की भले ही ये कथनी शंकराचार्य के हो लेकिन इसके पीछे करनी किसी और की हो सकती है । 

भारत आईडिया का विचार :
भारत आईडिया का इस खबर पर  विचार यही है की 1925 से संघ चला आ रहा है और न जाने संघ पर कितने झूठे इल्जाम लगे फिर भी कोई संघ का कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाया और शायद इसी का आज ये नतीजा है की रास्टीय स्वयंसेवक संघ दुनिया की सबसे बरी संख्या वाली संस्था है। शंकराचार्य जैसे हजारो आये और हजारो गए लेकिन संघ की उन्नति को कोई रोक नहीं पाया।


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सम्पादक : आशुतोष उपाध्याय 


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