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Friday, 28 February 2020

सलमान खुर्शीद, कांग्रेस नेता का दिल्ली दंगो पर बरा बायन आया है , जाने क्या कहा उन्होंने .

समाचार के मुख्य बिंदु :-

सलमान खुर्शीद, कांग्रेस: मुझे लगता है कि इस समय एक-दूसरे पर चिल्लाना और आग जोड़ना स्पष्ट रूप से जवाब नहीं है। पहली जिम्मेदारी मानवीय सहायता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि जहां कहीं भी आग लगी है, उसे जल्दी और प्रभावी रूप से धोया जाना चाहिए।



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    Thursday, 27 February 2020

    दिल्ली हिंसा पर सुनवाई टली,कपील मिश्रा पर बेबुनियाद आरोप, पढ़े पूरी खबर

    समाचार के मुख्य बिंदु :-

    1. दिल्ली हिंसा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है.
    2. दिल्ली पुलिस ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है.
    3. हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 13 अप्रैल तक का समय दे दिया है.
    4. हाई कोर्ट ने गृह मंत्रालय को दिल्ली हिंसा मामले में पक्षकार बनाए जाने की दलील को मंजूरी दी.
    5. केंद्र और दिल्ली पुलिस के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा भड़काऊ बयानों पर नहीं हो सकती करवाई.
    6. याचिकाकर्ता केवल तीन भड़काऊ बयानों को चुनकर कार्रवाई की मांग नहीं कर सकता.
    7. इन तीन हेट स्पीच के अलावा कई और हेट स्पीच है, जिसको लेकर शिकायत दर्ज कराई गई.
    8. हम हिंसा को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं : तुषार मेहता.
    9. केंद्र को पक्षकार बनाया जाए या नहीं ये कोर्ट को तय करना है, याचिकाकर्ता को नहीं : तुषार मेहता.
    10. कल तक हमने 11 और आज 37 एफआईआर दर्ज किया. कुल 48 एफआईआर दर्ज किए गए है : तुषार मेहता.


      दिल्ली  हिंसा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई  शुरू हो गई है:-
      दिल्ली( Delhi)  हिंसा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट(Delhi High Court) में सुनवाई शुरू हो गई है. दिल्ली पुलिस(Delhi Police) ने कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है. इस पर हाई कोर्ट ने 13 अप्रैल तक का समय दे दिया है. तब तक केंद्र सरकार(central government) को भड़काऊ भाषण पर रिपोर्ट सौंपनी होगी. अब मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी. इसके साथ ही हाई कोर्ट(Delhi High Court) ने केंद्र सरकार यानी गृह मंत्रालय(Ministry of Home Affairs) को दिल्ली हिंसा मामले में पक्षकार बनाए जाने की दलील को मंजूरी दी.केंद्र और दिल्ली पुलिस के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता(Solicitor General Tushar Mehta) ने कहा कि कल कोर्ट ने आदेश जारी कर जवाब मांगा था कि जो भड़काऊ बयान दिए गए थे उनपर करवाई की जाए, जबकि ये बयान 1-2 महीने पहले दी गई. याचिकाकर्ता(The petitioner ) केवल तीन भड़काऊ बयानों को चुनकर कार्रवाई की मांग नहीं कर सकता.

      हम हिंसा को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं : तुषार मेहता :-
      सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता(Solicitor General Tushar Mehta) ने कहा कि हमारे पास इन तीन हेट स्पीच के अलावा कई और हेट स्पीच( hate speech) है, जिसको लेकर शिकायत दर्ज कराई गई. याचिकाकर्ता(The petitioner) ने चुनिंदा सिर्फ तीन वीडियो का हवाला दिया है. एक जनहित याचिका में ऐसा नहीं होता. केंद्र (Center) को पक्षकार बनाया जाए या नहीं ये कोर्ट(court ) को तय करना है, याचिकाकर्ता(The petitioner) को नहीं. हम हिंसा को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.केंद्र की इस दलील पर याचिकाकर्ता की ओर से बोले वकील कोलिन गोंजाल्विश(Colin Gonzalvish) ने कहा कि सबसे पहले आज ही सभी के खिलाफ एफआईआर(FIRs ) दर्ज हों, फिर फटाफट गिरफ्तारी भी हो..


      हमारे पास कई और क्लिप्स:-
      तुषार मेहता(Tusshar Mehta) ने कहा कि मौजूदा माहौल इस बात के लिए उपयुक्त नहीं है कि हम चुनिंदा तरीके से उन्हीं तीन वीडियो ( बीजेपी नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा की स्पीच) (Speeches by BJP leaders Kapil Mishra, Anurag Thakur and Pravesh Verma) को देखे. इस पर चीफ जस्टिस डीएन पटेल(Chief Justice DN Patel) ने पूछा कि 11 एफआईआर दर्ज की गई हैं ? जवाब देते हुए सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता(Solicitor General Tushar Mehta ) ने कहा कि कल तक हमने 11 और आज 37 एफआईआर दर्ज किया. कुल 48 एफआईआर दर्ज किए गए है. याचिकाकर्ता इस पर एफआईआर चाहता है कि कपिल मिश्रा( Kapil Mishra ) ने ऐसा किया या वारिस पठान ने ऐसा किया. मौत या आगजनी या लूटपाट होने पर हमें एफआईआर(FIR) दर्ज करनी होती है. अन्य मुद्दों में समय लगता है.


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      Wednesday, 17 July 2019

      कर्नाटक का नाटक : कर्नाटक में भाजपा सरकार, नए सीएम येदियुरप्पा!



      नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है भारत आइडिया के इस  नए संस्करण के समाचार लेख में। भारत आइडिया के पाठकों आज इस लेख में हम बात करेंगे कर्नाटक के नाटक के बारे में जहां बीजेपी का आना लगभग तय माना जा रहा है, येदुरप्पा होंगे कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री ।

      समाचार पढ़ने से पहले एक गुजारिस , हमारे फेसबुक पेज को  लाइक कर हमारे साथ जुड़े। 



      कर्नाटक (Karnataka Crisis) की सियासत में भूचाल आ गया है। आज यानी बुधवार को आये सुप्रीम कोर्ट (Kumarswamy Government Floor Test ) के फैसले के बाद कर्नाटक के सभी बागियों को आज़ादी तो मिल गई है, लेकिन इससे कुमार स्वामी (CM H. D. Kumaraswamy ) सरकार का संकट और गहरा गया है। कोर्ट के फैसले के बाद यह दावा किया जा रहा है कि अब कर्नाटक में भाजपा सरकार बनने वाली है, जल्द ही सीएम कुमार स्वामी इस्तीफा देंगे और भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बनेंगे।


      सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा (B. S. Yeddyurappa) ने दावा कर दिया था कि हमारे पास बहुमत है और कल मुख्यमंत्री कुमारस्वामी (Kumarswamy Government Floor Test ) इस्तीफा देंगे। कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जनादेश खो दिया है और जब उनके पास बहुमत नहीं है तो कल उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं। यह लोकतंत्र और संविधान की जीत है, साथ ही बागी विधायकों की नैतिकता की भी जीत है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश अंतरिम है। स्पीकर की शक्तियों को लेकर बाद में फैसला आएगा।





      कर्नाटक (Kumarswamy Government Floor Test ) का सियासी नाटक अपने अंतिम चरण पर पहुँच चुका है। कांग्रेस-जेडीएस ( Congress jds ) गठबंधन की सरकार पर संकट के बादल गहराते जा रहे हैं, वहीं भाजपा अपने जीत को लेकर आश्‍वस्‍त नजर आ रही है। भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा पहले ही अपनी सरकार बनने को लेकर निश्चिंत हो चुके हैं। शायद इसीलिए प्रदेश भाजपा अध्‍यक्ष बीएस येदियुरप्पा विधायकों के साथ क्रिकेट का लुत्‍फ उठाते हुए नजर आए। इतना ही नहीं वे भजन गाते भी दिखे। उन्होंने सरकार गिराने को लेकर कहा कि उन्हें अगले चार से पांच दिन में राज्य में सरकार बना लेने का भरोसा है।

      कुमारस्वामी बहुमत साबित नहीं कर पाएंगे। यह बात कुमारस्वामी भी जानते हैं। वह सदन में बढ़िया भाषण देने के बाद पद से इस्तीफा दे देंगे। अब 18 जुलाई को विधानसभा की बैठक होगी जिसमें मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी सत्तारूढ़ कांग्रेस-जनता दल-सेक्युलर (JDS) गठबंधन सरकार को बचाए रखने के लिए विश्वास मत पेश करेंगे, जिसके बाद ही यह तय हो पायेगा कि राज्य में किसकी सरकार रहेगी।



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      Saturday, 6 July 2019

      अल्पेश ठाकोर ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा, राहुल गांधी पर लगाए अनेक आरोप ।




      नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है भारत आइडिया के इस  नए संस्करण के समाचार लेख में। भारत आइडिया के पाठकों आज इस लेख में हम बात करेंगे अल्पेश ठाकोर के बारे में जिन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है तथा राहुल गांधी पर इल्ज़ाम लगाते हुए कहा है की वो धोखेबाज है।

      समाचार पढ़ने से पहले एक गुजारिस है, हमारे फेसबुक पेज को  लाइक कर हमारे साथ जुड़े। 



      गुजरात में राज्यसभा की दो सीटों के लिए उपचुनाव हो रहा है. कांग्रेस ने व्हिप जारी किया है. इसके बावजूद कांग्रेस के दो विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है. कांग्रेस बागी विधायक अल्पेश ठाकोर और धवन झाला ने बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में वोट किए हैं. क्रॉस वोटिंग करने के बाद अल्पेश ठाकोर ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया.

      इस्तीफा देने के बाद अल्पेश ठाकोर ने कहा कि मैंने राहुल गांधी पर भरोसा करके कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन की थी, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्होंने हमारे लिए कुछ नहीं किया. पार्टी जनाधार खो चुकी है, और हमारे साथ द्रोह हुआ है. हर बार हमें बेइज्जत किया गया, इसलिए मैंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है और कांग्रेस छोड़ दी है.




      वोटिंग करने के बाद अल्पेश ठाकोर ने कहा कि मैंने अंतर आत्मा की आवाज सुनकर और राष्ट्रीय नेतृत्व को ध्यान में रखकर मतदान किया है. जो पार्टी (कांग्रेस) जन अधिकार खो चुकी है और जिस पार्टी ने हमारे साथ द्रोह किया है, उसे मद्देनजर रखकर वोटिंग किया है.



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      Friday, 5 July 2019

      सुब्रमण्यम स्वामी से पूछा राहुल के इस्तीफे पर क्या कहेंगे, मिला हैरान करने वाला जवाब




      नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है भारत आइडिया के इस  नए संस्करण के समाचार लेख में। भारत आइडिया के पाठकों आज इस लेख में हम बात करेंगे सुब्रमण्यम स्वामी के बारे में जिन्होने राहुल गांधी के इस्तीफे पर हस्यादपक टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी का मजाक उड़ाया है ।

      समाचार पढ़ने से पहले एक गुजारिस है, हमारे फेसबुक पेज को  लाइक कर हमारे साथ जुड़े। 



      राजनीति से बच नहीं पा रहे हैं। उनके इस्तीफे की गूंज सिर्फ कांग्रेस में ही नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी में भी सुनाई दे रही है। हालांकि कांग्रेस पार्टी उनके इस्तीफे की खबरों को दबाने की कोशिश कर रही थी लेकिन अब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी राहुल के इस्तीफे पर चुप्पी तोड़ दी है। आजतक न्यूज वेबसाइट के मुताबिक जब स्वामी से राहुल के इस्तीफे पर पूछा तो उन्होंने हैरान करने वाला जवाब दिया।


      लोकसभा चुनाव की हार की वजह से दिया इस्तीफा
      राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा तो 40 दिन पहले ही दे दिया था लेकिन उसको कांग्रेस ने सार्वजनिक नहीं किया था। वहीं पार्टी उनके इस्तीफे की खबरों को दबा रही थी और उनको मनाने की जी तोड़ कोशिशें हो रही थीं। इसके बाद भी राहुल नहीं माने और बुधवार को आखिरकार उन्होंने अपना इस्तीफा सार्वजनिक कर दिया।






      राहुल के इस्तीफे के बारे में भाजप नेता और सांसद सुब्रमण्यम स्वामी से पूछा गया तो उन्होंने हैरानी भरा बयान दिया। 

      उन्होंने राहुल को कायर करार देते हुए कहा कि वो मैदान को छोड़कर भाग रहे है। वहीं स्वामी पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष पर तंज कसते हुए बोले कि मंदिर जाने और जनेऊ पहनने से कुछ नहीं होगा है। राजनीति करने के लिए बहुत त्याग की जरूरत होती है।



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      Thursday, 4 July 2019

      इन तीन में से कोई एक होगा कांग्रेस का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष!




      नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है भारत आइडिया के इस  नए संस्करण के समाचार लेख में। भारत आइडिया के पाठकों आज इस लेख में हम बात करेंगे कांग्रेस के नए अध्यक्ष के बारे में की आखिर आने वाले समय में कांग्रेस का अध्यक्ष उम्मीदवार कौन होगा ।

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      कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा अपने पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद अब पार्टी नए अध्यक्ष की तलाश में है। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को आगामी कुछ दिनों में नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला है। इस पद के लिए पार्टी की ओर से कई दावेदार सामने आए हैं, लेकिन इन में तीन दिग्गज नेताओं की दावेदारी सबसे प्रबल बताई जा रही है। 

      जो तीन नेता इस पद के लिए प्रबल दावेदार हैं, उनमें वशिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे, मीरा कुमार और मल्किार्जुन खडग़े शामिल हैं। इससे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की भी इस पद के लिए दावेदारी बताई जा रही है। 





      जो भी हो राहुल गांधी के अपने पर से इस्तीफा देने के बाद आगमी कुछ दिनों में कांग्रेस को नया अध्यक्ष जरूर मिल जाएगा। इससे पहले राहुल गांधी ने बुधवार को  साफ कर दिया है कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है और पार्टी को नया अध्यक्ष का चुनाव कर लेना चाहिए।

      लोकसभा चुनावों में पार्टी को मिली हार के बाद से ही वो पार्टी अध्यक्ष पद छोडऩे को लेकर अड़े हुए है। कांग्रेस के वशिष्ठ नेता राहुल गांधी को पद पर बने रहने के लिए मनाने में असफल रहे। 



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      Saturday, 29 June 2019

      राहुल गांधी के दर्द के बाद कांग्रेस में लगी इस्तीफे की झड़ी, अबतक 120 नेताओं का इस्तीफा




      नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है भारत आइडिया के इस  नए संस्करण के समाचार लेख में। भारत आइडिया के पाठकों आज इस लेख में हम बात करेंगे कांग्रेस के बारे में जो अपने सबसे बुरी समय से गुजर रही है ।

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      कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बयान के बाद पार्टी में इस्तीफों की झड़ी लग गई है. शुक्रवार को कई प्रदेश अध्यक्षों समेत 120 पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है. लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने पर अड़े हुए हैं. हाल ही में राहुल ने दुख जताते हुए कहा था कि उनके इस्तीफे के बाद किसी मुख्यमंत्री, महासचिव या प्रदेश अध्यक्षों ने हार की जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा नहीं दिया. लेकिन अब कांग्रेस में इस्तीफों की बारिश हो गई.

      इस्तीफा देने में बड़े नेताओं में दिल्ली कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया भी शामिल हैं. इसके अलावा हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमित्रा चौहान ने भी अपना इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस्तीफे की पेशकश की थी. वहीं अब एमपी प्रभारी और महासचिव दीपक बावरिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.




      लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष के पद पर बने रहना नहीं चाहते. कांग्रेस नेता लगातार राहुल को मनाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन अब पार्टी पदाधिकारियों ने भी राहुल गांधी को इस्तीफा भेज दिया है. एक पत्र पर हस्ताक्षर कर पार्टी नेताओं ने इस्तीफा दिया है.

      इस पत्र पर अभी तक कांग्रेस के 120 पदाधिकारी हस्ताक्षर हैं. इसमें AICC सचिव, यूथ कांग्रेस, महिला कांग्रेस पदाधिकारी शामिल हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पर आगे और नेता भी हस्ताक्षर कर सकते हैं. राहुल गांधी के सम्मान में ये सामूहिक इस्तीफे दिए गए हैं.



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      Friday, 21 June 2019

      पंजाब में दीवारों पर लगे सिद्धू के पोस्टर, जानें क्या है मामला




      नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है भारत आइडिया के इस  नए संस्करण के समाचार लेख में। भारत आइडिया के पाठकों आज इस लेख में हम नवजोत सिंह सिद्धू के बारे में जिनकी पोस्टर आजकल दीवारों पर छाई हुई है ।

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      कांग्रेस नेता नवजोति सिंह सिद्धू के राजनीति से सन्यास की मांग एक बार फिर से पंजाब के पोस्टरों में उठने लगी है। लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की हार के बाद से ही नवजोत सिंह सिद्धू से नेता और सोशल मीडिया यूजर लगातार वादा निभाने और राजनीति से सन्यास लेने की बात याद दिला रहे हैं। एक बार फिर से मोहाली में दीवारों पर पोस्टर चिपकाए गए हैं, जिनमें नवजोत सिंह सिद्धू को याद दिलाया जा रहा है कि आप राजनीति कब छोड़ रहे हैं?

      समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पंजाब के मोहाली में नवजोत सिंह सिद्धू की तस्वीर लगे पोस्टर दिख रहे हैं, जिनमें लिखा गया है- आप राजनीति कब छोड़ रहे हैं? समय आ गया है कि आप अपने वादा निभाएं। हम आपके इस्तीफे का इंतजार कर रहे हैं।




      बता दें कि बीजेपी उम्मीदवार स्मृति ईरानी के हाथों प्रतिष्ठित अमेठी लोकसभा सीट कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ से गंवाने के बाद से ही पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री नवोजत सिंह सिद्धू के इस्तीफे की मांग चल रही है। ज्यादातर ये मांग सोशल मीडिया पर उनके आलोचक कर रहे हैं। दरअसल, अप्रैल में सिद्धू ने इस बात की घोषणा की थी कि अगर राहुल गांधी अमेठी से चुनाव हारते हैं तो वह राजनीति छोड़ देंगे।

      अक्सर विवादित बयानों के लिए पहचाने जाने वाले सिद्धू की पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंद सिंह आलोचना करते रहे हैं क्योंकि सिद्धू ने कई बार ऐसे बयान दिए हैं जिनसे पार्टी और राज्य के नेतृत्व की किरकिरी हुई है।



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      Thursday, 20 June 2019

      राहुल नहीं माने, नियुक्त हुआ कांग्रेस का अगला अध्यक्ष जाने नाम ।




      नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है भारत आइडिया के इस  नए संस्करण के समाचार लेख में। भारत आइडिया के पाठकों आज इस लेख में हम बात करेंगे कांग्रेस के ऊपर जिसने अगले कांग्रेस अध्यक्ष पर लगभग मुहर मार ही दिया है ।

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      राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं। पार्टी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी अपना पद छोडऩे की जिद पर अड़े हुए हैं। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस संबंध में अपना मन बना लिया है और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को इसके लिए तैयार रहने को भी कह दिया गया है।

      बताया जा रहा है कि अभी तक यह तय नहीं किया गया है कि गहलोत अकेले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे या कुछ नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाएगा। हां, इतना तय है कि आगमी कुछ दिनों में कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिल जाएगा, जो गांधी परिवार का सदस्य नहीं होगा।




      अगर अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाता है तो राजस्थान के अगले मुख्यमंत्री सचिन पायलट बन सकते हैं। संगठन चलाने का पुराना अनुभव होने के साथ ही अशोक गहलोत के सोनिया गांधी और राहुल गांधी से अच्छे रिश्तों के कारण भी उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की संभावना अधिक है। अशोक गहलोत के अन्य नेताओं से भी अच्छे संबंध है।

      बताया जा रहा है कि इस इससे पहले अशोक गहलोत ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई देते हुए देश व जनहित में उनसे पार्टी अध्यक्ष बने रहने का आग्रह किया, लेकिन राहुल गांधी पद छोडऩे पर अड़े हुए हैं।



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      राहुल गांधी हैं अपने फैसले पर अडिग, ये नेता हो सकते हैं कांग्रेस के नए अध्यक्ष, ऐलान जल्द!




      नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है भारत आइडिया के इस  नए संस्करण के समाचार लेख में। भारत आइडिया के पाठकों आज इस लेख में हम बात करेंगे कांग्रेस के उस अहम मुद्दे पर जिसका जवाब खुद कांग्रेस भी लोकसभा चुनाव के बाद से तलाश रही है।जीहां आप सही सोच रहे है, नेतृत्व कौन करेगा कांग्रेस का ।

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      कांग्रेस पार्टी के आलाकमान में फेरबदल हो सकता है। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद से पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने को अड़े हुए हैं और अपने फैसले पर अडिग हैं। कांग्रेस के हर दिग्गज नेता ने उन्हें मनाने की कोशिश की है। अब खबर है कि पार्टी को जल्द नया अध्यक्ष मिल सकता है और वह गांधी परिवार का नहीं होगा।

      एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत पार्टी के अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। हालांकि इसको लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। लेकिन, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पार्टी को नया अध्यक्ष जरूर मिलेगा, जोकि गांधी परिवार से नहीं होगा।




      बीते दिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का जन्मदिन था और उन्हें बधाई देने के लिए अशोक गहलोत भी पहुंचे थे। इस दौरान गहलोत ने उसने पार्टी का अध्यक्ष बने रहने के लिए अनुरोध किया, लेकिन राहुल गांधी अपने निर्णय पर डटे हुए हैं। वह पार्टी की कमान अपने पास नहीं रखना चाहते हैं। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी चाहते हैं कि पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने के लिए एक नए अध्यक्ष की जरूरत है और जब तक वह नहीं मिलेगा तब तक पार्टी खड़ी नहीं हो सकती है।  

      इसके अलावा यह भी कहा जा रहा था कि अगर राहुल गांधी पार्टी के अध्यक्ष नहीं रहते हैं तो यह पद पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी को दिया जा सकता है, लेकिन उस पर भी राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि वे ऐसा करने नहीं जा रहे हैं और जो भी पार्टी का अध्यक्ष होगा वह गैर गांधी परिवार से होगा।  

      इधर, अशोक गहलोत को लेकर राहुल गांधी इसलिए मन बना रहे हैं कि उनके पास संगठन चलाने का लंबा अनुभव रहा है और पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी उस पर उन्होंने अधिकतर वार बेहतर प्रदर्शन किया। इसके साथ-साथ गहलोत पिछड़ी जाति से भी आते हैं और कांग्रेस अपनी खोई जमीन को वापस पाने के लिए इस नाम के सहारे आगे बढ़ सकती है। 




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      Tuesday, 18 June 2019

      सदन के पहले दिन ही राहुल गाँधी ने की बेवकूफी पूरे सदन में बना मजाक।




      नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है भारत आइडिया के इस  नए संस्करण के समाचार लेख में। भारत आइडिया के पाठकों आज इस लेख में हम राहुल गाँधी की उस बेवकूफी के बारे में बात करने वाले है जिसमे उन्होंने फिर से सदन के पहले दिन हि बेवकूफी भरी हरकत कर खुद का मजाक बनवा लिया।

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      राहुल गाँधी ने भी लिया शपथ 
      कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सत्रहवीं लोकसभा की सदस्यता के लिए सोमवार को शपथ ग्रहण की। महासचिव स्नेहलता श्रीवास्तव ने केरल के सदस्यों की बारी आने पर करीब चार बजे राहुल गाँधी का नाम पुकारा जिस पर कांग्रेस के सदस्यों ने जोर जोर से मेज़ें थपथपाकर उनका स्वागत किया। राहुल गाँधी अगली पंक्ति में कुछ ही देर पहले आकर अपनी मां सोनिया गांधी के बगल में बैठे थे। नाम पुकारे जाने पर वह उठे और अगली पंक्ति में बैठे सदस्यों का औपचारिक अभिवादन करते हुए शपथ लेने पहुंचे। राहुल ने अंग्रेजी में शपथ ग्रहण की। उनके शपथ लेेने पर विपक्षी बेंचों से मेजें खूब थपथपायीं गयीं।




      राहुल दस्तखत करना भूल गए
      हालांकि राहुल गांधी इस दौरान संसद रजिस्टर पर दस्तखत करना भूल गए। शपथ लेने के बाद जब वह अपनी सीट की तरफ जाने लगे तब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई सांसदों द्वारा याद दिलाए जाने के बाद उन्होंने संसद रजिस्टर पर दस्तखत किए। राहुल गांधी इस बार केरल के वायनाड से सांसद चुने गए हैं।. कांग्रेस अध्यक्ष को उनकी परंपरागत सीट अमेठी में बीजेपी की स्मृति ईरानी से 55 हजार से अधिक वोटों से हार का सामना करना पड़ा। बता दें कि राहुल गांधी चौथी बार सांसद चुने गए हैं।

      कांग्रेस अध्यक्ष सुबह सदन सत्र आरंभ होने तथा प्रधानमंत्री एवं प्रमुख मंत्रियों के शपथ लेने के वक्त मौजूद नहीं थे। बताया गया है कि वह शहर से बाहर गये थे और सुबह ही राजधानी लौटे हैं।



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      Sunday, 16 June 2019

      बंगाल में अब टीएमसी और कांग्रेस के बीच खूनी लड़ाई, टीएमसी के 3 कार्यकर्ता की मौत




      नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है भारत आइडिया के इस  नए संस्करण के समाचार लेख में। भारत आइडिया के पाठकों आज इस लेख में हम बात करेंगे पश्चिम बंगाल के बारे में जहां अब टीएमसी और कांग्रेस के बीच झरप हुई है जिसमें टीएमसी के कुछ कार्यकर्ता मारे गए है ।

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      टीएमसी और कांग्रेस के बीच झरप
      पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद  में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई है। इसमें टीएमसी के तीन कार्यकर्ताओं की मौत हो गई है। स्थानीय सूत्र और पुलिस के  मुताबिक शनिवार सुबह टीएमसी और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई।

      इसमें टीएमसी कार्यकर्ता खैरुद्दीन शेख और सोहेल राणा और एक अन्य कार्यकर्ता की मौत हो गई ।ईससे पहले लोकसभा चुनाव से पहले ढोमकोल पंचायत समिति के अल्ताफ हुसैन की भी हत्या कर दी गई थी। इस घटना के मुख्य आरोपी को कुछ दिन बाद रिहा कर दिया गया था।




      घटना के बाद भारी पुलिस बल तैनात 
      बताया जा रहा है कि सोहेल राणा अल्ताफ हुसैन का बेटा है और खैरुद्दीन शेख उसका बड़ा भाई है। इस घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है। कार्यकर्ताओं की मौत के पीछे टीएमसी ने कांग्रेस का हाथ बताया है।

      खैरुद्दीन के बेटे ने कहा कि हम सो रहे थे, तभी अचानक घर पर बम से हमला हुआ। उन्होंने हमारे पिता पर हमला किया। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले मेरे चाचा की भी हत्या कर दी गई थी। उन्होंने इस हत्या के पीछे कांग्रेस का हाथ बताया है।



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      Tuesday, 11 June 2019

      कर्नाटक में जल्द ही गिर सकती है गठबंधन कि सरकार, कुमारस्वामी ने दिए संकेत।




      हालांकि अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या कर्नाटक सरकार पर वाकई किसी तरह का कोई खतरा मंडरा रहा है? दरअसल, कर्नाटक चुनाव में बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं. लेकिन कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बना ली. इसके बाद से ही कई बार कर्नाटक सरकार को अस्थिर करने की कई बातें सामने आईं. वहीं लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद से कर्नाटक सरकार पर और ज्यादा खतरा मंडराने की बातें सामने आने लगीं. लोकसभा चुनाव में राज्य की 28 लोकसभा सीटों में से बीजेपी ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 25 सीटों पर कब्जा जमाया. 1-1 सीट कांग्रेस और जेडीएस को मिली और 1 निर्दलीय ने जीती.




      कांग्रेस और जेडीएस के जरिए कई बार बीजेपी पर आरोप भी लगाए गए कि बीजेपी कर्नाटक सरकार को गिराने के लिए उनके विधायकों को खरीदने की कोशिश कर रही है. हालांकि बीजेपी इन आरोपों से इनकार करती आई है. आम चुनाव के बाद बीजेपी का कहना है कि कर्नाटक की गठबंधन सरकार में आतंरिक कलह है और सरकार साल भर भी नहीं टिक पाएगी.




      दूसरी तरफ कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के बेटे निखिल कुमारस्वामी का एक वीडियो वायरल होने के बाद अटकलों का दौर गरमा गया है. इसमें वह जेडीएस कार्यकर्ताओं से विधानसभा चुनावों के लिए तैयार रहने को कह रहे हैं. निखिल कुमारस्वामी ने कहा कि चुनाव कभी भी हो सकते हैं, अगले साल भी या दो-तीन साल बाद भी. उन्होंने कहा, 'हमें अभी से शुरुआत करनी होगी. यह नहीं कहना कि बाद में करेंगे. अगले महीने से ही इसकी तैयारी शुरू करनी है.' हालांकि राजनीतिक गलियारों में इसके कई मतलब निकाले जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि जेडीएस-कांग्रेस से अलग राह चुन रही है और कर्नाटक में मध्यावधि चुनाव हो सकते हैं.



      Monday, 10 June 2019

      जय श्री राम के नाम के नारे पर सत्रुधन सिन्हा उतरे ममता के बचाव में और दिया ये घटिया बयान !!




      पश्चिम बंगाल इस समय भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच जंग का अखाड़ा बन चुका है। दोनों दलों के समर्थकों में जमकर हिंसा भी हो रही है और शनिवार को चार बीजेपी कार्यकर्ताओं की मौत भी हो गई थी। ममता को लगातार जय श्रीराम लिखे पोस्टकार्ड भेजे जा रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा ममता बनर्जी के समर्थन में आ गए हैं। एनडीटीवी न्यूज वेबसाइट के मुताबिक उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर जय श्रीराम लिखे पोस्टकार्ड पर चुप्पी तोड़ दी और बड़ा बयान दे दिया है।




      इस वजह से भेजे जा रहे हैं ममता को पोस्टकार्ड
      ममता बनर्जी को पोस्टकार्ड भेजने की वजह उनके साथ घटी दो घटनाएं हैं जिनमें अपने सामने जय श्रीराम का नारा लगते ही ममता नाराज हो गईं। वहीं एक मामले में तो पुलिस ने नारे लगा रहे लोगों को गिरफ्तार तक कर लिया। इसी मुद्दे को बीजेपी ने उछाल दिया और ममता बनर्जी को श्रीराम के नारे का विरोध करने वाला बता दिया। इस घटना के बाद से ही पूरे देश से ममता को जय श्रीराम लिखे पोस्टकार्ड भेजे जा रहे हैं। हालांकि ममता कह चुकी हैं कि उनको राम के नाम से नहीं बल्कि राम के नाम पर हो रही राजनीति से समस्या है।





      कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है। पोस्टकार्ड के मुद्दे पर वो सीएम ममता बनर्जी के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने ट्विट में कहा कि ममता बनर्जी को बिना किसी वजह के उकसाना ठीक बात नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने अंग्रेजी में इनफ इज इनफ भी कह दिया। वहीं शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि राम के नाम पर हो रही सियासत बंद होनी चाहिए। वो बोले कि चुनाव के बाद ममता बनर्जी का अपमान किया जा रहा है औऱ इसको देश की जनता देख रही है।




      Sunday, 9 June 2019

      मंत्रालय छिना, सलाहकार समूहों से बाहर, Sidhu हुए घर में ही बाहरी, जाने कारण ?




      पंजाब सरकार में पर्यटन मंत्रालय गँवाने के बाद अब नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह के आठ महत्वपूर्ण परामर्शदाता समूहों में भी जगह नहीं मिली है। यह समूह मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नौकरशाहों को मिलाकर बने हैं और इनका काम पंजाब की राज्य सरकार की महत्वपूर्ण परियोजनाओं की निगरानी करना है। समूहों के सदस्यों की घोषणा कल (8 जून, शनिवार) को की गई है। एक प्रेस विज्ञिप्ति के मुताबिक मुख्यमंत्री खुद शहरी नवीनीकरण और ड्रग्स-विरोधी मुहिम से जुड़े समूहों की अध्यक्षता करेंगे।




      लोकसभा निर्वाचन और उससे पहले पुलवामा–बालाकोट प्रकरण के दौरान कॉन्ग्रेस को अपनी अनर्गल बयानबाजी से नुकसान पहुँचाने वाले सिद्धू को कैप्टेन ने लोकसभा चुनाव के बाद हुए अपने कैबिनेट पुनर्गठन में पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। 1965 की जंग में सेना में सेवाएँ दे चुके कैप्टेन बालाकोट पर सिद्धू के बयान से खासा नाराज़ चल ही रहे थे। जब कैप्टेन ने सीधे-सीधे सिद्धू के पाकिस्तानी सेना प्रमुख को गले लगाने पर निशाना साधा था, तभी पक्का हो गया था कि वह सिद्धू पर कार्रवाई करेंगे। पुनर्गठन में सिद्धू को अपेक्षाकृत ‘हल्के’ माने जाने वाले ऊर्जा और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय का प्रभार दिया गया था, जो उन्होंने खबर लिखे जाने तक ग्रहण नहीं किया है।





      इस बीच खबर यह भी है कि दिल्ली में डेरा डाले सिद्धू ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से मिलने के लिए समय माँगा है। नवजोत सिंह सिद्धू को कैप्टेन ने किनारे पर खड़ा कर दिया है। जैसे कैप्टेन ने सिद्धू को सीधे बाहर कर विक्टिम-कार्ड खेलने का मौका देने की बजाय कम वरीयता के मंत्रालय पकड़ा कर ‘घर में ही बाहरी’ कर दिया है, उसी तरह भाजपा ने भी ‘शॉटगन’ शत्रुघ्न सिन्हा को उकसावे के हद तक जाने वाली अनुशासनहीनता के बावजूद बाहर निकालने की बजाय पार्टी के अंदर रखेे-रखे ही इतना अप्रासंगिक कर दिया कि खिसिया कर शत्रुघ्न को खुद ही पार्टी छोड़नी पड़ी।




      नवजोत सिंह सिद्धू की इस बात से राजनीति जगत में आया भूचाल, कांग्रेस की दो गुट बनी ।




      पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू इन दिनों अपनी ही पार्टी के निर्णयों से नाराज चल रहे हैं. उनके खिलाफ लोकसभा चुनाव के बाद सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने काफी कड़ा रुख अख्तियार किया था । नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब सरकार की गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक का बहिष्कार कर दिया। कहा जा रहा है कि वे खुद पर किए जा रहे हमलों से नाराज हैं। वे कांग्रेस पार्टी की ओर से खुद को निशाना बनाए जाने से नाराज हैं। अब सवाल उठता है कि नवजोत सिंह सिद्धू को कांग्रेस ने जब स्टार प्रचारक बनाया था तो सवाल उनसे पूछे ही जाएंगे। ऐसे में उनकी नाराजगी की वजह अब सामने आई है। उन्होंने खुलकर तमाम मसलों पर अपनी राय रखी है।




      पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि राज्य की शहरी सीटों पर लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी की जीत शानदार रही है। इसमें हमारे शहरी विकास विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका थी। मुख्यमंत्री ने मुझे पंजाब में दो जिलों की जिम्मेदारी दी। हमने इन दोनों जिलों में बड़ी जीत हासिल की। उन्होंने कहा कि कुछ सीटों पर हार एक सामूहिक जिम्मेदारी है। मेरा विभाग सार्वजनिक रूप से एकल हो गया है। किसी के पास चीजों को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की क्षमता होनी चाहिए।





      नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि सारी जवाबदेही मुझे नहीं दी जा सकती है। मैं एक परफॉर्मर रहा हूं। मैं पंजाब के लोगों के प्रति जवाबदेह हूं। दरअसल, सिद्धू ने गुरुवार को कैबिनेट की बैठक के बहिष्कार के बाद इसके कारणों को साफ किया है। अब यह लगने लगा है कि पंजाब कांग्रेस में सबकुछ सही नहीं चल रहा है। नवजोत सिंह सिद्धू पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह गुटबाजी करने और मुख्यमंत्री बनने के लिए साजिश रचने का आरोप लगाया था। अब जवाबी हमला सिद्धू की ओर से हो रहा है। इन तमाम मसलों के बीच कांग्रेस के भीतर हंगामा बढ़ रहा है।




      गुरु की उल्टी गिनती शुरू, मिलने वाली है अब तक की सबसे बडी खबर ?




      लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त का मुंह देखने के बाद अब कांग्रेस की अंदरूनी कलह सामने आने लगी है. अपने बयानों ने सुर्खियों में रहने वाले नवजोत सिंह सिद्धू की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं. सिद्धू को पंजाब कैबिनेट से हटाने की कवायद ने तेज हो गई है. जानकारों की मानें तो राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ ही बड़े नेताओं से सिद्धू को मंत्रिमंडल से हटाने की बात कर ली है.कैप्टन के अलावा राज्य के कई मंत्री भी इस कवायद में लगे हुए हैं. पंजाब कैबिनेट के मंत्रियों का कहना है कि लोकसभा चुनावों में सिद्धू की बयानबाजी और हरकतों के कारण कैप्टन अमरिंदर के साथ-साथ राहुल गांधी की छवि भी खराब हुई है.




      इसके अलावा सीएम अमरिंदर ने गुरुवार को सिद्धू का विभाग बदलने की बात भी कही थी. उन्होंने कहा था कि सिद्धू अपना विभाग नहीं संभाल पा रहे हैं. उन्होंने कहा था कि चुनावों के दौरान धर्मग्रथों की बेअदबी पर की गई सिद्धू की टिप्पणी पर भी राहुल गांधी से बात की जाएगी.


      बता दें कि चुनाव से ठीक एक दिन पहले सिद्धू ने 2015 में धार्मिक ग्रथों की बेअदबी के बाद की जा रही जांच पर सवाल उठाया था. सीएम कैप्टन अमरिंदर ने कहा था कि नवजोत सिंह सिद्धू की पकिस्तान के सेना प्रमुख से दोस्ती और झप्पी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. खास तौर पर भारतीय सेना तो इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर सकती है.




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