बीजेपी को मिल गया है महारष्ट्र में शिवसेना का विकल्प

बीजेपी ने भी गठबंधन का का तोड़ सोचना सुरु कर दिया है जिहां अभी बीते दिन ही बीजेपी के एक नेता ने एनसीपी के प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की जो की...

बीजेपी ने भी गठबंधन का का तोड़ सोचना सुरु कर दिया है जिहां अभी बीते दिन ही बीजेपी के एक नेता ने एनसीपी के प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की जो की शिवसेना के विरुद्ध अच्छा विकल्प है।



पुरे देश में इस समये राजनीतिक तूफान उठा हुआ है जिहाँ लगभग सारी विपक्षी पार्टिया सत्तारूढ़ि बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन बनाने की कोशिश कर रही है ताकि बीजेपी के जित रथ को रोका जा सके, मोदी लहर ख़त्म किया जा सके। इसकी भनक हमने कर्नाटक के विधानसभा के चुनाव में देखि जब बीजेपी कुछ शीटों से जादुई आकड़े से दूर रहा गयी तब कांग्रेस ने जेडीएस के साथ मिलकर बिना किसी सर्त के सरकार बनाली और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने कुमारस्वामी। कुमारस्वामी के सपथ ग्रहण में देश की लगभग साड़ी विपक्षी पार्टी के बरे नेता शपथग्रहण में पहुंचे थे जिसको कांग्रेस महागठबंधन का ट्रेलर बताती है।

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लेकिन कांग्रेस की इन नीतियों को थोड़ा झटका लग सकता है क्युकी बीजेपी के नेता नितिन गडकरी ने एक दाव खेला है जिससे विपक्ष में खलबली मच गयी है। आपको बता दे की केंद्रीय सड़क प्रवहण मंत्री श्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार से पुणे में मुलाकात की। दोनों नेताओ की मुलाकात लगभग 20 मिनट तक चली जिसके बाद दोनों नेताओ ने मीडिया से कहा की विकास पर चर्चा करने के लिए ये मीटिंग की गयी थी लेकिन इन दोनों के मुलाकात के बाद राजनितिक माहौल काफी गरमा गया है। आपको हम बतादे की इन दोनों के मुलाकात के बाद ये कयास लगाये जा रहे की कही ये मुलाकात 2019 के चुनाव के लिए तो नहीं थे।

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आपको हम एक और बात बताना चाहेंगे की अभी बीजेपी की महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन की सरकार है और आये दीन शिवसेना अपने बागी तेवर बीजेपी को दिखाती रहती है जोकि बीजेपी के लिए चिंता का विषय है क्युकी शिवसेना ने अगर अपना समर्थन बीजेपी से वापस लिया तो बीजेपी की सरकार गिर जाएगी, लेकिन अब बीजेपी ने शायद शिवसेना के अलग होने के बाद का विकल्प खोज लिया है। शिवसेना अगर बीजेपी से अपना समर्थन वापस लेती है तो बीजेपी एनसीपी के साथ मिल के फिर से महाराष्ट्र में अपनी सरकार बना सकती है। बरहाल इस मीटिंग के मायने जो भी हो लेकिन शिवसेना के लिए ये चिंता का विषय है।

सम्पादक :विशाल कुमार सिंह  
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