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प्रशांत किशोर को क्यों निकाला गया था बीजेपी से, या फिर यूँ कहें क्यों छोरा था प्रशांत किशोर ने बीजेपी ?

मुख्य  बिंदु :-

  1. प्रशांत किशोर ने  नीतीश कुमार को विकास के दावों पर दी थी चुनौती.
  2. प्रशांत किशोर बिहार चुनाव में बनना चाहते है किंग मेकर। 
  3. 2011 में जुड़े थे मोदी टीम से 
  4. प्रशांत किशोर हेल्थ प्रोफेशन में भी कर चुके है काम 
  5. प्रशांत किशोर पेपर प्रकाशित के जरिये एक कारोबारी की मदद से  मिले थे मोदी से 
  6. 2012  गुजरात चुनाव में कर चुके  है बीजेपी के लिए काम 
  7. 2014 के बीजेपी की प्रचंड जित में निभाई थी अहम् भूमिका 
  8. किशोर चाहते थे PMO में एंट्री 
  9. इसी वर्ष CAA पर पार्टी लाइन से अलग राय रखने के कारन निकाले गए थे JDU से 
  10. प्रशांत किशोर है अवसरवादी : बीजेपी नेता 



विकास के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने दिया था नितीश को चैलेंज :-
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने बीते दिनों एक प्रेस वार्ता कर बिहार सरकार और मुखिया नीतीश कुमार  को चुनौती दी थी. उन्होंने राज्य सरकार और उसके द्वारा किये जा रहे विकास के दावों को भी खारिज किया था. CAA पर जनता दल युनाइटेड से अलग राय देने वाले किशोर को इसी साल जनवरी में पार्टी से निकाल दिया गया था. इसके बाद से ही वह नए सियासी घर की तलाश में हैं. माना जा रहा है कि इस साल होने वाले बिहार चुनाव 2020 (Bihar Election 2020) में वह नीतीश और बीजेपी के विरोध में गठबंधन बनाना चाह रहे हैं. इसी कड़ी में वह कई नेताओं से मुलाकात भी कर चुके हैं.


किशोर चाहते थे PMO में एंट्री:-
बिहार में जन्मे किशोर ने यूपी में पढ़ाई पूरी की. साल 2011 में टीम मोदी में एंट्री पाने वाले किशोर ने संयुक्त राष्ट्र के लिए हेल्थ प्रफेशनल के तौर पर अफ्रीकी देश चाड में काम कर चुके हैं. गुजरात (Gujarat) के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की नजर उन पर तब गई जब उन्होंने गुजरात में कुपोषण के मुद्दे पर एक पेपर प्रकाशित किया था. साल 2011 में मोदी की किशोर से मुलाकात हुई और साल 2012 के गुजरात चुनाव में किशोर ने काम किया और फिर मोदी के करीब हो गए.साल 2014 में जब बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया तब किशोर अपनी टीम के साथ दिल्ली आ गए और यहां से बीजेपी (BJP) के लिए वॉर रूम बना कर प्रचार प्रसार का जिम्मा संभाला. अंग्रेजी अखबार द संडे इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत के बाद किशोर चाहते थे कि उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय में एंट्री मिले.लेकिन उनके मनमुतबित काम ना होने के कारण पार्टी से थी नाराजगी 


बीजेपी नेता ने प्रशांत किशोर को बताया अवसरवादी :-
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि किशोर की कंपनी I-PAC के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि वह (किशोर) सरकार में लैटरल एंट्री के समर्थक थे. उन्होंने ही इस बारे में प्रधानमंत्री को आइडिया दिया था. सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया कि पीके अपनी टीम के साथ पीएमओ में एक टीम का नेतृत्व करतना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री ने खुद इस योजना में दिलचस्पी दिखाई थी.भारतीय जनता पार्टी की गुजरात इकाई के एक वरिष्ठ नेता ने किशोर को महत्वाकांक्षी बताते हुए अवसरवादी तक कहा. बीजेपी नेता ने बताया - साल 2011 में एक रियल स्टेट कारोबारी ने नरेंद्र मोदी से किशोर की मुलाकात कराई थी, तब उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि किशोर की महत्वाकांक्षा है कि वह राजनीति में आगे बढ़ें. किशोर लंबे समय तक लोगों से चुनावी रणनीतिकार और एक कंपनी चलाने वाले शख्स के तौर पर मुलाकात करते हैं. उनका कोई सिद्धांत नहीं है. वह सिर्फ अवसरवादी हैं.'और
एक्स्ट्रा ज्ञान  
जहाँ तक अवसरवादी होने की बात है तो अवसरवादी लोग हमेशा पैसो को महत्वा देते है, न की राष्ट्र को. उदहारण की तौर पर नितीश कुमार  अवसरवादी है किन्तु क्षेत्र के हिसाब से अवसरवादी लोग अपनी चाल चलते है.नितीश कुमार कुर्सी के लोभ में अवसरवादी है तो प्रशांत किशोर पैसो के लिए अवसरवादी है जो पैसो के लिए पार्टियों का प्रचार करते है.


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