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तेजप्रताप यादव का दावा बिहार के असली लालू वही है, कोई माई का लाल डाल के दिखाए जेल में.

मुख्य  बिंदु :-
  1. तेजप्रताप यादव का दावा  बिहार के असली लालू वही है.
  2. पार्टी की कमान अभी तेजश्वी यादव के हाथों में है.
  3. तेजप्रताप ने तेजश्वी यादव को कहा घबराओ  मत तुम भी असली लालू हो.
  4. तेजप्रताप ने तेजश्वी के लिए खून का एक-एक कतरा बहाने की बात कही.
  5. तेजप्रताप ने अपने  विरोधियों को भी ललकारा और उन्हें खुली चुनौती दी गिरफ्तार करने के लिए. 
  6. तेजप्रताप ने सिर्फ अपने पापा लालू यादव और जगदानन्द अंकल से डरने की बात कही.
  7. तेजप्रताप के समर्थकों पर  भड़के जगदानन्द बाबू.



    तेजप्रताप यादव का दावा  बिहार के असली लालू वही है :-
    राजद सुप्रीम लालू प्रसाद यादव  की गैरहाजिरी में भले ही पार्टी की कमान तेजस्वी यादव (Tejashvi Yadav) के हाथों में है, पार्टी भले ही तेजस्वी को अपना भावी मुख्यमंत्री मान रही हो, लेकिन तेजप्रताप यादव का दावा है कि बिहार का असली लालू वही हैं. तेजप्रताप ने आरजेडी की पटना में हुई रैली में यह कहकर सबको हैरत में डाल दिया. खुद तेजस्वी भी एक पल के लिए सन्न रह गए थे, तभी तेजप्रताप ने छोटे भाई की ओर देखते हुए कहा कि अर्जुन आप घबराओ मत. आप भी असली लालू हैं. मैं कोई आपका मजाक नहीं उड़ा रहा, आपके लिए तो हम खून का एक-एक कतरा बहा देंगे.


    तेजप्रताप आरजेडी की रैली में पूरे फार्म में दिखे :-
    तेजप्रताप आरजेडी की रैली में पूरे फार्म में दिखे. तेजप्रताप यादव ने सबसे पहले तो अपने विरोधियों को ललकारा. उन्‍होंने कहा, 'जो लोग हमारे अर्जुन और मुझे जेल भेजने की तैयारी कर रहे हैं, अगर वो माई के लाल हैं तो हम दोनों भाइयों को गिरफ्तार करके दिखाएं. हम तो डंके की चोट पर रथ पर चढ़ेंगे और खुद तेजस्वी के रथ का सारथी भी बनेंगे. इसके बाद तेजप्रताप ने बताया कि वो आखिर किन दो लोगों से डरते हैं. तेजप्रताप अपने पापा लालू यादव से बहुत डरते हैं और उनका बहुत सम्मान भी करते हैं. उसके बाद तेजप्रताप को अपने जगदानन्द अंकल के अनुशासन से बहुत डर लगता है.


    तेजप्रताप के कार्यकर्ताओ पर भरके जगदानन्द सिंह :-
    आरजेडी की कमान जब से जगदानन्द सिंह के हाथों में आई है, तब से वह पार्टी को अनुशासित करने में जुटे हैं. कुछ हद तक जगदानन्द सिंह ने पार्टी में अनुशासन लाया भी है, लेकिन आरजेडी की रैली में तेज़-तेजस्वी के समर्थकों ने पार्टी के अनुशासन की धज्जियां उड़ा दी. फिर जो जगदानन्द सिंह भड़के, उन्होंने पार्टी के समर्थकों को यहां तक कह दिया कि अगर आप इस तरह से अनुशासन तोड़ेंगे तो उन्हें मजबूरन सभा रोकनी पड़ेगी. जगदानन्द बाबू ने मंच के पास नारा लगा रहे आरजेडी समर्थकों को खूब खड़ी खोटी सुनाई. इतने पर तेजप्रताप यादव भी भड़क गए और अपने कुछ समर्थकों को मंच पर बुलाने के लिए जगदानन्द से अड़ गए. आखिरकार जगदानन्द सिंह को लालू के लाल के सामने झुकना ही पड़ा.

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    प्रशांत किशोर को क्यों निकाला गया था बीजेपी से, या फिर यूँ कहें क्यों छोरा था प्रशांत किशोर ने बीजेपी ?

    मुख्य  बिंदु :-

    1. प्रशांत किशोर ने  नीतीश कुमार को विकास के दावों पर दी थी चुनौती.
    2. प्रशांत किशोर बिहार चुनाव में बनना चाहते है किंग मेकर। 
    3. 2011 में जुड़े थे मोदी टीम से 
    4. प्रशांत किशोर हेल्थ प्रोफेशन में भी कर चुके है काम 
    5. प्रशांत किशोर पेपर प्रकाशित के जरिये एक कारोबारी की मदद से  मिले थे मोदी से 
    6. 2012  गुजरात चुनाव में कर चुके  है बीजेपी के लिए काम 
    7. 2014 के बीजेपी की प्रचंड जित में निभाई थी अहम् भूमिका 
    8. किशोर चाहते थे PMO में एंट्री 
    9. इसी वर्ष CAA पर पार्टी लाइन से अलग राय रखने के कारन निकाले गए थे JDU से 
    10. प्रशांत किशोर है अवसरवादी : बीजेपी नेता 



    विकास के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने दिया था नितीश को चैलेंज :-
    चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने बीते दिनों एक प्रेस वार्ता कर बिहार सरकार और मुखिया नीतीश कुमार  को चुनौती दी थी. उन्होंने राज्य सरकार और उसके द्वारा किये जा रहे विकास के दावों को भी खारिज किया था. CAA पर जनता दल युनाइटेड से अलग राय देने वाले किशोर को इसी साल जनवरी में पार्टी से निकाल दिया गया था. इसके बाद से ही वह नए सियासी घर की तलाश में हैं. माना जा रहा है कि इस साल होने वाले बिहार चुनाव 2020 (Bihar Election 2020) में वह नीतीश और बीजेपी के विरोध में गठबंधन बनाना चाह रहे हैं. इसी कड़ी में वह कई नेताओं से मुलाकात भी कर चुके हैं.


    किशोर चाहते थे PMO में एंट्री:-
    बिहार में जन्मे किशोर ने यूपी में पढ़ाई पूरी की. साल 2011 में टीम मोदी में एंट्री पाने वाले किशोर ने संयुक्त राष्ट्र के लिए हेल्थ प्रफेशनल के तौर पर अफ्रीकी देश चाड में काम कर चुके हैं. गुजरात (Gujarat) के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की नजर उन पर तब गई जब उन्होंने गुजरात में कुपोषण के मुद्दे पर एक पेपर प्रकाशित किया था. साल 2011 में मोदी की किशोर से मुलाकात हुई और साल 2012 के गुजरात चुनाव में किशोर ने काम किया और फिर मोदी के करीब हो गए.साल 2014 में जब बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया तब किशोर अपनी टीम के साथ दिल्ली आ गए और यहां से बीजेपी (BJP) के लिए वॉर रूम बना कर प्रचार प्रसार का जिम्मा संभाला. अंग्रेजी अखबार द संडे इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत के बाद किशोर चाहते थे कि उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय में एंट्री मिले.लेकिन उनके मनमुतबित काम ना होने के कारण पार्टी से थी नाराजगी 


    बीजेपी नेता ने प्रशांत किशोर को बताया अवसरवादी :-
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि किशोर की कंपनी I-PAC के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि वह (किशोर) सरकार में लैटरल एंट्री के समर्थक थे. उन्होंने ही इस बारे में प्रधानमंत्री को आइडिया दिया था. सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया कि पीके अपनी टीम के साथ पीएमओ में एक टीम का नेतृत्व करतना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री ने खुद इस योजना में दिलचस्पी दिखाई थी.भारतीय जनता पार्टी की गुजरात इकाई के एक वरिष्ठ नेता ने किशोर को महत्वाकांक्षी बताते हुए अवसरवादी तक कहा. बीजेपी नेता ने बताया - साल 2011 में एक रियल स्टेट कारोबारी ने नरेंद्र मोदी से किशोर की मुलाकात कराई थी, तब उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि किशोर की महत्वाकांक्षा है कि वह राजनीति में आगे बढ़ें. किशोर लंबे समय तक लोगों से चुनावी रणनीतिकार और एक कंपनी चलाने वाले शख्स के तौर पर मुलाकात करते हैं. उनका कोई सिद्धांत नहीं है. वह सिर्फ अवसरवादी हैं.'और
    एक्स्ट्रा ज्ञान  
    जहाँ तक अवसरवादी होने की बात है तो अवसरवादी लोग हमेशा पैसो को महत्वा देते है, न की राष्ट्र को. उदहारण की तौर पर नितीश कुमार  अवसरवादी है किन्तु क्षेत्र के हिसाब से अवसरवादी लोग अपनी चाल चलते है.नितीश कुमार कुर्सी के लोभ में अवसरवादी है तो प्रशांत किशोर पैसो के लिए अवसरवादी है जो पैसो के लिए पार्टियों का प्रचार करते है.


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    बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को दी कड़ी चेतावनी पढ़े पूरी रिपोर्ट.

    मुख्य  बिंदु :-
    • बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गिरिराज सिंह को चेताया.
    • गिरिराज सिंह के बयानों  पर नाराजगी जताई.
    • बेवजह की बयानबाजी से बचने की सलाह दी.
    • हाल ही में गिरिराज सिंह ने देवबंद को आतंक की गंगोत्री कहा था.
    • पार्टी को लगता है कि दिल्ली में हार का कारण उसकी बयानबाजी रही थी.
    • दिल्ली चुनाव में हार के कारण पार्टी कर रही है डैमेज कंट्रोल



    बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गिरिराज सिंह को चेताया:-
    बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को तलब किया है. सूत्रों के मुताबिक, जेपी नड्डा ने गिरिराज सिंह को बेवजह बयानबाजी से बचने को कहा है. उन्होंने गिरिराज सिंह के बयानों पर नाराजगी जताई. हाल ही में गिरिराज सिंह ने देवबंद को लेकर विवादित बयान दिया था. उन्होंने देवबंद को 'आतंक की गंगोत्री' कहा था. दरअसल, बीते मंगलवार को गिरिराज सिंह सहारनपुर पहुंचे थे. यहां पर उन्होंने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि बड़े आतंकवादी सब यहीं से निकले हैं, फिर वो चाहे हाफिज सईद ही क्यों न हो.


    नागरिकता कानून पर गिरिराज सिंह ने  दिए थे तीखे बयान :-
    नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर निशाना साधते हुए गिरिराज सिंह ने कहा था, "यह सीएए के खिलाफ नहीं बल्कि भारत के खिलाफ हैं क्योंकि अगर CAA के खिलाफ होता तो, शाहीनबाग से शरजिल इमाम की ये आवाज नहीं निकलती कि हम भारत को असाम से काट देंगे और भारत को कमजोर करने का काम करेंगे. इतना ही नहीं भारत में इस्लामिक राष्ट्र बना देने तक की बात कह डाली. शाहीन बाग से शरजिल इमाम यह नहीं बोलता कि हमारी कौम से जो टकराया है वह बर्बाद हो गया है. वहां से अफजल गुरू और याकूब मेमन के नारे नहीं लगते. इससे साफ जाहिर हो रहा है कि बच्चों और औरतों में जहर भरा जा रहा है."


    बीजेपी कर रही है डैमेज कंट्रोल:-
    विवाद बढ़ने पर उन्होंने कहा था, "मेरा बयान सही है और यदि किसी को बयान से दिक्कत है तो वह यूपी पुलिस से उस सूची के बारे में पूछ सकता है कि कितने लोग आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त हैं."  दिल्ली चुनाव में भी बीजेपी पार्टी के नेताओं ने विवादित बयान दिए थे जिसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा. अब पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुट गई है.


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