इस्लामिक मुल्क मालदीव न भूले हमारे ऐहसानो को दो नावों की सवारी पर सकती है महँगी।

इस्लामिक मुल्क मालदीव न भूले हमारे ऐहसानो को दो नावों की सवारी पर सकती है महँगी। बैंगलोर : मालदीव जो की एक मुस्लिम देश है , उसके बारे में ...

इस्लामिक मुल्क मालदीव न भूले हमारे ऐहसानो को दो नावों की सवारी पर सकती है महँगी।


बैंगलोर :
मालदीव जो की एक मुस्लिम देश है , उसके बारे में बरी ही रोचक कहानी है.... जो शायद आपको पता नहीं होगी , दरअसल आज मालदीव जो दो नावों की सवारी करना चाहता है ...वो कभी कभी बीते वर्षो में भारत का हीशा हो सकता था लेकिन राजीव गाँधी की गलती के कारन मालदीव भारत का हिशा नहीं हो पाया। 

आइये हम आपको बताते है की ऐसा आखिर हुआ क्या था की मालदीव भारत में शामिल नहीं हो पाया था। 
जब तमिलियन्स और मालदीव के लोगो के बिच लड़ाई चल रही थी और तमिलियन्स ने मालदीव के ऊपर पूरी तरह से कब्ज़ा कर लिया था और राष्ट्रपति आवास तक पहुँचने ही वाले थे की राजीव गाँधी ने मालदीव को बचाने के लिए अपनी सेना भेज दी और मालदीव एक तमिलियन देश बनते बनते रह गया। 

आज वही मालदीव जो की एक मुस्लिम देश है दो नावों की सवारी कर रहा है , लेकिन मालदीव को ये याद रखना चाहिए की अक्सर दो नावों की सवारी करने वाले डूब जाया करते है.....  मै  ऐसा इस लिए कह रहा हूँ क्युकी मालदीव के राजदूत मोहम्द फैजल आजकल चीन से मित्रता बढाने में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी ले रहे है। मालदीव को ये याद रखना चाहिए की चीन वही देश है जिसने अपने देश में मुसलमानो के मूल अधिकारों को छीन अपने नियम के साथ जीने पर मजबूर कर दिया है। 

मालदीव के राजदूत मोहमद फैजल ने चीन के दौरे पर कहा है की , भारत भले ही उनका भाई हो लेकिन चीन उस बिछड़े भाई की तरह है जो वर्षो बाद मिला है। मालदीव के राजदूत मोहमद फैजल ने ये साफ करते हुए कहा की मालदीव चीन की हर निति पर साथ है बिना दिल्ली की परवाह किये हुए। 

आपको हम बता दे की मालदीव ने ये माना है की भारत और चीन  के टकराओ में फ़सने का खतरा है.... आपको हम बताना चाहेंगे की आखिर चीन क्यों इतनी दिलचस्पी ले रहा है मालदीव में , तो बात ये है की मालदीव से नजदीक हिन्द महासागर को चीन एक महत्वपूर्ण रेसम मार्ग मनाता है और चीन ने वहां काफी निवेश कर रखा है..... और इसी निति के तहत चीन ने मालदीव के बीते दिनों के आपातकाल में वहाँ के राष्ट्रपति की काफी मदद की थी और इसी कारन से इन दोनों देशो में नजदीकियां बढ़ रही है।   

भारत विज़न की राय : भारत के साथ अक्सर ऐसा ही होता आया है हमने जिसकी भी मदद की उसी ने हमारे देश के पीठ में छुरा भोका है। अगर हमने अभीभी उदारवाद को नहीं छोरा और विस्तारवाद की तरफ नहीं गए तो शायद आने वाले शमए में हम खुद को विश्व के नक्से पर भी नहीं देख पाए। 

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विशाल कुमार सिंह
 


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